क्राइम
अयोध्या राम मंदिर दान विवाद – ₹20 हजार वेतन वाले कर्मियों की करोड़ों की संपत्ति पर SIT जांच शुरू

अजय सिंह
अयोध्या/लखनऊ: अयोध्या के भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की जाने वाली दान राशि में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। मंदिर के दानपात्रों से निकलने वाली राशि की गिनती में तैनात कुछ संविदा कर्मचारियों पर गाज गिरने के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल का गठन कर दिया है।
गोबर के ढेर से नकदी और बेनामी संपत्ति के आरोप जांच से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, संशय के घेरे में आए मुख्य कर्मचारी लवकुश मिश्रा के परिसर पर छापेमारी के दौरान लगभग 10 लाख रुपये की नकद राशि बरामद की गई है। इस नकदी का एक हिस्सा कथित तौर पर परिसर में मौजूद गोबर के ढेर में छिपाकर रखा गया था।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब जांच एजेंसियों को पता चला कि महज 18,000 से 20,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले इन कर्मचारियों ने हाल ही में बड़ी संपत्तियां खरीदी हैं। शुरुआती जांच के मुताबिक, एक कर्मचारी के नाम पर करीब 1.5 करोड़ रुपये की भूमि और दूसरे के नाम पर 40 लाख रुपये का एक प्लॉट होने की बात सामने आई है। फिलहाल लवकुश के साथ एक अन्य कर्मचारी से भी गहन पूछताछ की जा रही है।
परिजनों ने आरोपों को नकारा दूसरी ओर, मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका दावा है कि बरामद की गई राशि अवैध नहीं है, बल्कि परिवार ने अपनी कृषि भूमि को गिरवी रखकर यह धन एकत्र किया था। उन्होंने संपत्ति से जुड़े दावों को भी अतिशयोक्तिपूर्ण बताया।
मामले पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल धार्मिक आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है। विवाद बढ़ने के बाद सूबे की सरकार ने वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की अगुवाई में SIT को कमान सौंप दी है। टीम को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासनिक दृष्टिकोण: सुरक्षा और जांच एजेंसियों का मानना है कि चूंकि मामला अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। SIT इस बात की पड़ताल कर रही है कि यह वित्तीय हेरफेर केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
