उत्तराखण्ड
95 साल की उम्र में इंसाफ की जंग: विश्वासघात का दर्द लेकर न्याय की गुहार लगा रहे त्रिलोचन सिंह भसीन
पवनीत सिंह बिंद्रा
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इन्द्रजीत गार्डन निवासी 95 वर्षीय त्रिलोचन सिंह भसीन आज अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव में न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। उन्होंने अपने जीवनभर की कमाई से एक भवन का निर्माण कराया था, जिसे उन्होंने विश्वास के आधार पर एक परिवार को किराए पर दिया। लेकिन वही विश्वास अब उनके लिए सबसे बड़ा दर्द बन गया है।
त्रिलोक सिंह भसीन के अनुसार, शुरुआत में किरायेदार नियमित रूप से किराया देता रहा, लेकिन कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और इलाज के लिए उन्हें मुंबई जाना पड़ा। लंबे समय तक इलाज चलने के दौरान किरायेदार ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर पूरे भवन को अपने नाम करा लिया। इतना ही नहीं, भवन में बिना अनुमति के एक स्कूल भी संचालित किया जाने लगा।
इलाज के बाद जब त्रिलोचन सिंह भसीन वापस लौटे और किराया मांगा, तब उन्हें पूरे मामले की जानकारी हुई। आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकियां भी दी गईं और कहा गया कि “अब बुढ़ापा हो गया है, आराम करो, यह बिल्डिंग हमारी है।”
इसके बाद उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई। मामले में आयुक्त दीपक रावत के संज्ञान लेने पर भवन में संचालित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की गई। प्रशासन ने स्कूल को बंद कर भवन को सील कर दिया।
हालांकि, त्रिलोचन सिंह भसीन का कहना है कि अभी तक उन्हें वास्तविक इंसाफ नहीं मिला है। उन्होंने न्यायालय में वाद दायर किया है और अब उन्हें अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद है।
- 95 वर्ष की उम्र में एक बुजुर्ग की यह पीड़ा न केवल विश्वासघात की कहानी बयां करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक बुजुर्गों को अपनी ही संपत्ति के लिए संघर्ष करना पड़ेगा,, वर्तमान समय उन्हें न्यायालय पर भरोसा है कि अवश्य न्याय मिलेगा, लेकिन इस तरह पीढ़ा से उन्हें रोगो ने घेर लिया है एवं चलने में असमर्थ है,,
