उत्तराखण्ड
सैनिक सम्मान से गूंजा लोक भवन, ‘एक शाम सैनिकों के नाम’ में वीर जवानों का अभिनंदन

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि “एक शाम सैनिकों के नाम” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सैनिकों के साहस, शौर्य, बलिदान और राष्ट्रसेवा को समर्पित सामूहिक सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है, जहां के सैनिकों ने सदैव देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए राष्ट्र का गौरव बढ़ाया है।
राज्यपाल ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य, दृढ़ संकल्प और सामरिक क्षमता का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में भारतीय सेनाओं ने असाधारण साहस, समन्वय और रणनीतिक दक्षता का परिचय दिया तथा उत्तराखंड के जवानों का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य के सैनिक, पूर्व सैनिक, वीर नारियां और सैनिक परिवार केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज में अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति के प्रेरणास्रोत भी हैं। सैनिकों को “भूतपूर्व नहीं, अभूतपूर्व” बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि सैनिक जीवन व्यक्ति को आजीवन अनुशासन, आत्मसंयम और राष्ट्रसेवा की भावना से ओत-प्रोत करता है।
कार्यक्रम में राज्यपाल ने वीर माताओं और वीर नारियों को भी नमन किया तथा सैनिक परिवारों से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रथम महिला गुरमीत कौर, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, सैनिक कल्याण सचिव युगल किशोर पंत सहित बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारी, वीर सैनिक, पूर्व सैनिक और उनके परिवारजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर को राज्यपाल प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।
