उत्तराखण्ड
शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, विद्यार्थियों को जीने की कला भी सिखाते हैं: राष्ट्रपति

शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति ने देश के शिक्षकों के प्रति व्यक्त की कृतज्ञता, कहा—शिक्षण कर्म वृत्ति नहीं, व्रत है
नई दिल्ली, 4 सितंबर 2026। शिक्षक दिवस के अवसर पर भारत की राष्ट्रपति ने देश के सभी शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक नियति-निर्माता होते हैं। वे करोड़ों विद्यार्थियों के जीवन में विद्या, कौशल, नैतिकता और प्रेरणा का संचार करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, बल्कि अपनी गतिविधियों और आचरण से विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में देश के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षक की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना। उन्होंने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से जब पूछा गया था कि उन्हें वैज्ञानिक या राष्ट्रपति के रूप में याद किया जाएगा, तो उन्होंने शिक्षक के रूप में याद किए जाने की इच्छा व्यक्त की थी।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षक को सदैव श्रद्धेय और विद्यार्थी को श्रद्धालु माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में शिक्षकों से विद्यार्थियों को अपनी संतान की तरह स्नेह करने, भेदभाव रहित व्यवहार करने, धैर्य रखने और विद्यार्थियों के कल्याण को प्राथमिकता देने की अपेक्षा की गई है। इसी भावना के साथ लगभग तीन हजार वर्ष पहले तैत्तिरीय उपनिषद में ‘आचार्यदेवो भव’ का संदेश दिया गया।
अपने शिक्षकों के स्नेह को किया याद
राष्ट्रपति ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि उन्हें अपने जीवन में अत्यंत स्नेही और अच्छे शिक्षकों का मार्गदर्शन मिला। स्कूल की छुट्टी के बाद भी उनकी शिक्षिकाएं कभी-कभी घर पर उन्हें पढ़ाती थीं और देखभाल करती थीं। उन्होंने बताया कि सातवीं कक्षा के बाद गांव से बाहर जाकर पढ़ाई करने वाली वह पहली छात्रा थीं। आगे की शिक्षा के दौरान भुवनेश्वर में भी उन्हें शिक्षकों का भरपूर स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि स्नेही और समर्पित शिक्षक विद्यार्थियों में असीम क्षमता और प्रेरणा का संचार करते हैं। इससे विद्यार्थियों में चुनौतियों का सामना करने का साहस और बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने का उत्साह पैदा होता है। शिक्षक विद्यार्थियों के मार्गदर्शक होने के साथ-साथ उनके शुभचिंतक, मित्र और सहयात्री भी होते हैं।
जिज्ञासा और स्वतंत्र चिंतन को बढ़ावा दें शिक्षक
राष्ट्रपति ने कहा कि श्रेष्ठ शिक्षक की विशेषता के बारे में भारतीय संस्कृति और परंपरा में प्राचीन काल से चले आ रहे विचार आज भी प्रासंगिक हैं। महाकवि कालिदास के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस अध्यापक में प्रचुर ज्ञान के साथ उस ज्ञान को समझाने की क्षमता हो, वही अच्छा शिक्षक होता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहित करना चाहिए। उनमें जिज्ञासा उत्पन्न करना, प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देना, तर्कशक्ति विकसित करना और स्वतंत्र व्यक्तित्व के निर्माण में योगदान देना शिक्षण कार्य के महत्वपूर्ण आयाम हैं। ऐसी शिक्षा से सफल उद्यमी, प्रतिभाशाली वैज्ञानिक, सृजनशील कलाकार और चुनौतियों के नए समाधान देने वाले नागरिक तैयार होंगे।
‘शिक्षण कर्म केवल वृत्ति नहीं, एक व्रत है’
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षण कर्म केवल एक वृत्ति नहीं, बल्कि एक व्रत है। यह केवल व्यवसाय या नौकरी नहीं, बल्कि मानवता के निर्माण का पवित्र कार्य है। शिक्षक भावी पीढ़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त करते हैं और राष्ट्र के भविष्य को आकार देते हैं।
उन्होंने ओडिशा के रायरंगपुर स्थित श्री ऑरोबिंदो इंटीग्रल स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि विभिन्न विषय पढ़ाने के साथ वह बच्चों के साथ संगीत, खेलकूद और नाटक की तैयारियों में भी सक्रिय रूप से शामिल होती थीं। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों की तैयारियों तथा विद्यार्थियों के उत्साह को याद करते हुए उन्होंने कहा कि ये अनुभव आज भी उन्हें रोमांचित करते हैं।
विद्यार्थियों से बहुत कुछ सीखने का भी अवसर मिला
राष्ट्रपति ने कहा कि स्कूल की शिक्षा पूरी करने के वर्षों बाद भी उनके विद्यार्थी उन्हें पारिवारिक समारोहों में आमंत्रित करते रहे हैं। उन्हें अपने कई विद्यार्थियों के नाम और उपनाम आज भी याद हैं। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों को उन्होंने पढ़ाया, उनसे उन्होंने स्वयं भी बहुत कुछ सीखा। बच्चों की सहजता और जिज्ञासा शिक्षकों को लगातार सीखने के लिए प्रेरित करती है।
उन्होंने राष्ट्रपति भवन परिसर में स्थित स्कूल के विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के विषय पर पढ़ाने और उनसे बातचीत करने का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहता है कि वे विद्यार्थियों से मिलें और उनके विचारों को समझें।
वंचित बच्चों की शिक्षा को बताया सार्थक अनुभव
राष्ट्रपति ने बताया कि लगभग 11 वर्ष पहले उन्होंने अपने गांव में एक आवासीय विद्यालय की स्थापना की थी, जहां अनाथ और वंचित परिवारों के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि इन बच्चों से मिलने का अवसर उन्हें लगातार प्रेरणा देता है। इस वर्ष अपने जन्मदिन पर 20 जून को उन्होंने उन बच्चों से मुलाकात की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विद्यालय पहुंचे और बच्चों का उत्साहवर्धन किया। राष्ट्रपति ने इसे बच्चों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत बताया।
शिक्षकों को बच्चों के विश्वास की रक्षा का आह्वान
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा प्रदान करने का कार्य केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है। प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो अपने आचरण और उपलब्धियों से बच्चों के लिए रोल मॉडल बनता है, वह शिक्षा और प्रेरणा का अमूल्य स्रोत होता है।
उन्होंने कहा कि माता-पिता और अभिभावक बड़े विश्वास के साथ अपने बच्चों को शिक्षकों के पास भेजते हैं। इस पवित्र आस्था की रक्षा करना प्रत्येक शिक्षक का धर्म है। शिक्षक का व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि बच्चों में भय या आशंका उत्पन्न न हो, उनका मनोबल न टूटे और उनमें हीन भावना पैदा न हो। अच्छे शिक्षक विद्यार्थियों को उनके सर्वोत्तम स्वरूप तक पहुंचने में मदद करते हैं।
संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़े नई पीढ़ी
राष्ट्रपति ने कहा कि विद्यार्थी को अच्छा व्यक्ति बनाना शिक्षक का पावन कर्तव्य है। नैतिकता के मार्ग पर चलते हुए समृद्धि और यश प्राप्त करने वाले विद्यार्थी ही शिक्षक की सफलता के जीवंत प्रतिमान होते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत सामाजिक समावेश के साथ विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षकों से ऐसी पीढ़ी तैयार करने का आह्वान किया जो देश की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा को समझे, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ मानवता के हित में कार्य करे, अंत्योदय के आदर्शों को आत्मसात करे, पर्यावरण एवं पशु-पक्षियों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाए और व्यक्तिगत तथा सामूहिक जीवन में उत्कृष्टता हासिल करे।
राष्ट्रपति ने सभी देशवासियों से निष्ठावान और समर्पित शिक्षकों के प्रति सदैव सम्मान की भावना रखने का अनुरोध किया। उन्होंने कामना की कि समर्पित शिक्षकों के योगदान से भारत निरंतर शिक्षित, सशक्त और प्रगतिशील बने।

















