उत्तराखण्ड
हल्द्वानी में आईजी के सामने खुली शहर की समस्याओं की ‘पुलिस डायरी’, अपराध से लेकर नशे तक पर हुआ सीधा संवाद



हल्द्वानी अगस्त। अपराध की बदलती तस्वीर और लगातार सामने आ रहे साइबर अपराधों के बीच पुलिस और जनता के बीच दूरी कम करने की पहल के तहत शुक्रवार को हल्द्वानी में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कोतवाली हल्द्वानी के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती ने आम नागरिकों से सीधे संवाद करते हुए न केवल उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि साइबर अपराध, महिला एवं बाल सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों को लेकर जागरूक भी किया।
अपराध का तरीका बदला, इसलिए सुरक्षा का तरीका भी बदलना जरूरी
‘देवभूमि का सुरक्षा कवच’ अभियान के तहत आयोजित संवाद में आईजी ने कहा कि आधुनिक दौर में अपराधी भी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में नागरिकों को भी जागरूक और सतर्क रहना होगा। उन्होंने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी निवेश योजनाओं, एआई आधारित साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट और म्यूल अकाउंट जैसे मामलों को लेकर लोगों को सावधान किया।
उन्होंने विशेष रूप से बुजुर्गों और युवाओं से अपील की कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक संबंधी जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड अथवा अन्य संवेदनशील जानकारी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक को खोलने या जल्द मुनाफे के लालच में निवेश करने से पहले पूरी तरह सत्यापन करने की सलाह दी गई।
ठगी के बाद चुप्पी नहीं, तत्काल 1930 पर करें शिकायत
जनसंवाद में साइबर ठगी के बाद पीड़ित की ओर से की जाने वाली कार्रवाई को भी प्रमुखता से समझाया गया। पुलिस ने बताया कि ठगी होने के बाद समय गंवाना नुकसान को बढ़ा सकता है। ऐसे मामलों में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने तथा cybercrime.gov.in के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज कराने की जानकारी दी गई।
मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से ठगी की रकम को फ्रीज कराने की प्रक्रिया के बारे में भी लोगों को बताया गया। पुलिस ने कहा कि साइबर अपराध की सूचना जितनी जल्दी मिलेगी, रकम को रोकने की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बताईं सुविधाएं
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर पुलिस ने जीरो एफआईआर, एसओएस सुविधा, लाइव लोकेशन, वन स्टॉप सेंटर यानी सखी केंद्र और महिला हेल्पलाइन-181 की जानकारी दी। महिला चीता पुलिस की भूमिका के बारे में भी लोगों को बताया गया।
बच्चों से जुड़े अपराधों और उनकी सुरक्षा को लेकर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, मिशन वात्सल्य और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की कार्यप्रणाली समझाई गई। पुलिस ने अभिभावकों से बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर भी सजग नजर रखने की अपील की।
सड़क पर एक गलती पड़ सकती है भारी, गोल्डन ऑवर की समझाई अहमियत
जनसंवाद में सड़क सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती समय को महत्वपूर्ण बताते हुए ‘गोल्डन ऑवर’ के बारे में जानकारी दी गई। दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर मदद करने के लिए लोगों को प्रेरित किया गया।
राह-वीर यानी गुड सेमेरिटन योजना, एएनपीआर कैमरों, ई-चालान व्यवस्था, ब्लैक स्पॉट सुधार और यातायात नियमों के पालन के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं को कम करने पर जोर दिया गया।
नशे के खिलाफ लड़ाई में जनता को बनाया भागीदार
‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’ अभियान के तहत नशा तस्करी को लेकर पुलिस ने अपनी रणनीति साझा की। ऑपरेशन प्रहार के तहत नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई, जीरो टॉलरेंस नीति, अवैध संपत्तियों की जब्ती और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई की जानकारी दी गई।
आईजी ने कहा कि नशे के नेटवर्क को तोड़ने में सिर्फ पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। आम जनता की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से अपील की कि आसपास नशे की बिक्री या तस्करी की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। पहचान गोपनीय रखते हुए 1800-137-7001 (डायल अगेंस्ट ड्रग्स) अथवा मानस पोर्टल के माध्यम से सूचना देने की अपील की गई।
जनता ने भी पुलिस के सामने रखे अपने मुद्दे
कार्यक्रम केवल पुलिस की ओर से जागरूकता तक सीमित नहीं रहा। विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों, व्यापार मंडल के पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों, वरिष्ठ नागरिकों और स्थानीय नागरिकों ने अपने क्षेत्र की समस्याएं और सुझाव आईजी के सामने रखे।
आईजी ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को उनके प्रभावी और समयबद्ध समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का भरोसा दिया। कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राओं ने साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा, महिला सुरक्षा और नशामुक्त समाज जैसे विषयों पर विशेष रुचि दिखाई।
आपात स्थिति में नंबर याद रखने की अपील
पुलिस ने नागरिकों को विभिन्न आपातकालीन सेवाओं के नंबरों की जानकारी भी दी। संकट की स्थिति में 112, महिला सहायता के लिए 181, बच्चों से संबंधित मामलों में 1098 और साइबर ठगी के मामलों में 1930 पर तत्काल संपर्क करने की अपील की गई।
पुलिस अधिकारियों समेत बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम की शुरुआत आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती द्वारा कोतवाली हल्द्वानी परिसर में गार्ड की सलामी लेने के साथ हुई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक अपराध/यातायात नैनीताल डॉ. जगदीश चंद्र ने आईजी को स्मृति चिह्न भेंट किया।
कार्यक्रम में एसपी हल्द्वानी मनोज कुमार कत्याल, एसपी संचार रेवाधर मठपाल, क्षेत्राधिकारी विमल प्रसाद, प्रभारी निरीक्षक हल्द्वानी विजय मेहता, प्रभारी निरीक्षक काठगोदाम जसवीर सिंह चौहान, प्रभारी निरीक्षक बनभूलपुरा दिनेश फर्त्याल, प्रभारी निरीक्षक मुखानी सुशील जोशी, प्रभारी निरीक्षक यातायात भूपेंश पांडे, वाचक एसएसपी रमेश सिंह नेगी समेत पुलिस के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, छात्र-छात्राएं, व्यापार मंडल के पदाधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, वरिष्ठ नागरिक और स्थानीय गणमान्य नागरिक भी जनसंवाद में शामिल हुए।
संदेश साफ—सुरक्षित देवभूमि के लिए पुलिस के साथ जनता की भागीदारी जरूरी
जनसंवाद कार्यक्रम के माध्यम से पुलिस ने साफ संदेश दिया कि बदलते अपराधों से निपटने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है। साइबर अपराध हो, महिला-बाल सुरक्षा, सड़क हादसे या नशे का कारोबार—हर मोर्चे पर जागरूक नागरिक और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल ही सुरक्षा का मजबूत आधार बन सकता है।



