उत्तराखण्ड
मंडलायुक्त दीपक रावत ने रामनगर तहसील का किया निरीक्षण, लंबित राजस्व मामलों पर जताई नाराजगी



दाखिल-खारिज की पत्रावलियां 35वें दिन निरस्त होने पर तहसीलदार से स्पष्टीकरण तलब, दो साल से लंबित खुर्रे के मामलों में पटवारियों से भी जवाब लेने के निर्देश
रामनगर, 28 सितंबर 2026। मंडलायुक्त कुमाऊँ दीपक रावत ने सोमवार को तहसील कार्यालय रामनगर का निरीक्षण कर राजस्व अभिलेखों, न्यायालयीन प्रकरणों और जनसामान्य से जुड़े विभिन्न मामलों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने लंबित प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।
मंडलायुक्त ने न्यायालयों में लंबित वादों की समीक्षा करते हुए कहा कि कोई भी प्रकरण अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए। सभी वादों की नियमित सुनवाई करते हुए नियमानुसार और समयबद्ध तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा जिन प्रकरणों में कार्रवाई अपेक्षित है, उनमें अनावश्यक विलंब न करने के निर्देश दिए।
धारा-143 के मामलों का 10 दिन में निस्तारण
भू-उपयोग परिवर्तन से संबंधित धारा-143 के लंबित आवेदन पत्रों की समीक्षा करते हुए मंडलायुक्त ने निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों का नियमानुसार 10 दिन के भीतर निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि आमजन से जुड़े राजस्व मामलों में पारदर्शिता, नियमबद्धता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
दाखिल-खारिज में देरी पर तहसीलदार से स्पष्टीकरण
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि दाखिल-खारिज से संबंधित अधिकांश पत्रावलियां 35वें दिन निरस्त हो रही हैं। इस पर मंडलायुक्त दीपक रावत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए तहसीलदार का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दाखिल-खारिज के मामलों का नियमानुसार परीक्षण कर उनका समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
इसी प्रकार दो वर्ष से अधिक समय से लंबित खुर्रे से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए उन्होंने संबंधित पटवारियों से भी स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबे समय से लंबित मामलों की अलग से निगरानी करते हुए उनके निस्तारण में तेजी लाई जाए।
आमजन को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें
मंडलायुक्त ने उप जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि तहसील स्तर पर लंबित सभी प्रकरणों की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि आमजन को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। राजस्व कार्यों के त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण के साथ कार्यालयीय व्यवस्थाओं को भी सुव्यवस्थित रखा जाए।
अहलमद की तैनाती की मांग
निरीक्षण के दौरान अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मंडलायुक्त से शिष्टाचार भेंट कर तहसील में एक अहलमद की तैनाती किए जाने की मांग रखी। मंडलायुक्त ने आश्वस्त किया कि प्राथमिकता के आधार पर अहलमद की तैनाती की कार्यवाही की जाएगी।
उन्होंने अधिवक्ताओं से म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज से संबंधित मामलों में आमजन के बीच जागरूकता बढ़ाने में सहयोग करने का भी आह्वान किया।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान, तहसीलदार मनीषा मकराना सहित तहसील के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

















