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उत्तराखण्ड

आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट में फ्लोटिंग सोलर के विस्तार की रणनीति, नेट जीरो लक्ष्य को मिलेगी मजबूती

 

देहरादून,,3 सितंबर 2026। भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को गति देने के उद्देश्य से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम (FSPV) के विस्तार को लेकर राष्ट्रीय स्तर की व्यापक रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में भारत में FSPV के तीव्र विकास और प्रभावी तैनाती के लिए विभिन्न नीतिगत एवं नियामक उपायों की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट का औपचारिक विमोचन नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने किया। उन्होंने FSPV को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण उभरती सौर तकनीक बताया।

उन्होंने कहा कि फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक प्रणालियां बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भारत के नेट जीरो लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए नीति, निवेश और प्रभावी क्रियान्वयन के मार्गदर्शन में ऐसे साक्ष्य आधारित अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण हैं।

जलाशयों और तालाबों का होगा उपयोग

आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के माध्यम से मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का उपयोग सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकता है। इससे सीमित भूमि संसाधनों पर सौर परियोजनाओं के कारण बढ़ने वाले दबाव को कम करने के साथ ही देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि की संभावनाएं बढ़ेंगी।

रिपोर्ट में FSPV के विकास के लिए स्थल चयन, पर्यावरणीय सुरक्षा, नियामक व्यवस्था और वित्तीय प्रोत्साहन को प्रमुख क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। साथ ही देश में इस तकनीक के व्यापक विस्तार के लिए एक प्रभावी रणनीतिक ढांचा विकसित करने की सिफारिश की गई है।

वैश्विक अनुभवों का भी किया गया अध्ययन

प्रो. अरुण कुमार के नेतृत्व में तैयार अध्ययन में दुनिया के विभिन्न देशों में FSPV प्रणालियों की वर्तमान स्थिति, विकास के रुझान और तैनाती की व्यापक समीक्षा की गई। विभिन्न देशों में लागू नीतिगत एवं नियामक ढांचों का अध्ययन करने के बाद भारत के लिए उपयुक्त नीति एवं कार्यान्वयन संबंधी सुझाव तैयार किए गए हैं।

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में कहा कि संस्थान स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए विज्ञान आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि FSPV जैसी तकनीकें न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक होंगी, बल्कि वैश्विक जलवायु और जल संरक्षण के लक्ष्यों में भी योगदान देंगी।

स्वदेशी तकनीक और अनुसंधान पर जोर

रिपोर्ट के प्रमुख लेखक प्रो. अरुण कुमार ने कहा कि अध्ययन देशभर के विभिन्न FSPV हितधारकों के साथ समन्वय से तैयार किया गया है। यह रिपोर्ट FSPV क्षेत्र के विकास और भविष्य में होने वाले शोध के लिए आधार का काम कर सकती है।

उन्होंने कहा कि भारत को FSPV तकनीकों के स्वदेशी विकास के साथ-साथ जल निकायों पर इनके संभावित प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।

MNRE, CEA, SECI और NISE के अधिकारी रहे मौजूद

रिपोर्ट विमोचन कार्यक्रम में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA), सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा उद्योग जगत, सरकारी एवं निजी डेवलपर्स, वित्तीय संस्थानों और क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में अपर सचिव मयंक तिवारी, SECI के प्रबंध निदेशक आकाश त्रिपाठी, MNRE के संयुक्त सचिव JVN सुब्रमण्यम, CWC के S.D. शर्मा तथा TGREDCO लिमिटेड, हैदराबाद के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक Md. मुशर्रफ अली फारूकी सहित अनेक अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

आईआईटी रुड़की की यह पहल अनुसंधान, नीति और उद्योग के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट से नीति-निर्माताओं, विद्युत उपयोगिताओं, परियोजना डेवलपर्स और अन्य हितधारकों को भारत में टिकाऊ एवं कम-कार्बन वाली ऊर्जा प्रणालियों के विकास के लिए उपयोगी मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।

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