उत्तराखण्ड
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि — कश्मीर पर विचारों को किया याद

श्रद्धांजलि सभा में डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों, अखंड भारत के प्रति समर्पण तथा राष्ट्रीय एकता के लिए किए गए संघर्ष को याद किया गया। श्री भट्ट ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन त्याग और राष्ट्रसेवा का प्रेरणास्रोत था। उन्होंने कहा कि मुखर्जी का मानना था कि भारत एक राष्ट्र है और उसके भीतर अलग संविधान, अलग ध्वज एवं अलग शासन व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अपने प्रसिद्ध उद्घोष “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” के माध्यम से देश के समक्ष यह भावना रखी। श्री भट्ट ने बताया कि मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते हुए वहां समान संवैधानिक व्यवस्था लागू करने के लिए संघर्ष किया और अंततः देशहित में सर्वोच्च बलिदान दिया।
कार्यक्रम में मंडल उपाध्यक्ष विशंभर कांडपाल, बूथ अध्यक्ष हेम गंगोला, महेंद्र सिंह नगरकोटी, शीला राणा, वरिष्ठ कार्यकर्ता आर.डी. पांडे, एन.एस. किरौला, अशोक रावत, रमेश चंद्र तिवारी, गौरव नेगी, अशोक पपनै, हेम अवस्थी, कुंदन रावत, भानु त्रिपाठी, सुभाष पांडे, कुलदीप पांडे, संतोष जोशी, गीता राणा, उदिता तिवारी सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
