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उत्तराखण्ड

हरेला महोत्सव पर उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में वृहद वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ, सांसद अजय भट्ट ने किया पौधारोपण

 

हल्द्वानी,,, 14 जुलाई। उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक परंपरा, प्रकृति संरक्षण एवं हरित विकास के प्रतीक हरेला महोत्सव के अवसर पर उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में वृहद वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ सांसद Ajay Bhatt ने पौधारोपण कर किया। अभियान के प्रथम दिवस विश्वविद्यालय परिसर में फलोद्यान (फ्रूट ऑर्चर्ड) की स्थापना के उद्देश्य से विभिन्न फलदार प्रजातियों के लगभग 100 पौधे लगाए गए।

इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट ने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का जन-आंदोलन है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल का संकल्प लेने का आह्वान किया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि हरेला उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस पर्व को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी के निर्वहन के रूप में देखता है। हरेला सप्ताह के दौरान लगाए जाने वाले पौधे परिसर को हरित और सुंदर बनाने के साथ विद्यार्थियों एवं समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक चेतना का संचार करेंगे।

भौमिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विद्याशाखा के निदेशक प्रो. पी.डी. पंत ने कहा कि यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को सुदृढ़ करने और भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित एवं स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने का सार्थक प्रयास है।

हरेला कार्यक्रम के संयोजक एवं वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के समन्वयक डॉ. एच.सी. जोशी ने बताया कि हरेला सप्ताह के अंतर्गत अगले पाँच दिनों तक विश्वविद्यालय परिसर में वृहद वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान संचालित किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं शिक्षार्थी मिलकर लगभग 500 फलदार, औषधीय, पुष्पीय एवं छायादार पौधों का रोपण करेंगे।

उन्होंने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने में पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पंत (सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी) द्वारा निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसर में फलोद्यान के साथ-साथ मियावाकी पद्धति पर आधारित मिश्रित वन भी विकसित किया जाएगा, जिससे जैव विविधता संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, कार्बन अवशोषण तथा पर्यावरणीय संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण, पौधों के संवर्धन तथा हरित उत्तराखण्ड के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का सामूहिक संकल्प लिया। विश्वविद्यालय की यह पहल पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और जलवायु परिवर्तन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दीर्घकालिक कदम मानी जा रही है,

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