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उत्तराखण्ड

पत्रकारिता का कलम आज धमकियों के साए में: सत्य उजागर करने वालों पर सवालों की बौछार

 

हल्द्वानी,,, 6 मई 2026: आज पत्रकारिता को अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भ्रष्टाचार या किसी मुद्दे पर खबर छापने वाले पत्रकारों को ही भ्रष्टाचार का अंग ठहरा दिया जाता है। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि सत्य सामने लाने पर धमकियां मिलना आम हो गया है।

नारद जैसी भूमिका निभाने वालों पर आरोपों का दौर

पौराणिक कथाओं में नारद जी सत्य की खोज में आरोपों के शिकार हुए, वैसे ही आज पत्रकार स्रोतों से मिली सच्चाई उजागर करते हैं तो उन पर ही सवाल खड़े हो जाते हैं। एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया, “सच छापना हमारा धर्म और कर्म है, लेकिन इसके लिए स्वाभिमान जरूरी है। पैसा महत्वपूर्ण नहीं, जमीर की आवाज सुननी पड़ती है।”

धमकियों का सिलसिला: ‘तुझे देख लेंगे’ की धमकी

समाचार छापते ही फोन आते हैं—”तूने ये कैसे छापा, तुझे देख लेंगे।” उत्तराखंड जैसे राज्यों में स्थानीय सत्ता और माफिया का दबाव बढ़ रहा है। कुछ चंद ईमानदार पत्रकार ही सत्य के साथ खबरें ला पा रहे हैं, जिन पर समाज का विश्वास बाकी है।

सत्य-असत्य का फैसला कलम पर निर्भर

पत्रकारिता कोई आसान पेशा नहीं। आज कोई सच्चाई उजागर करे तो सीधे सवाल उठते हैं—”इसे मिला नहीं होगा।” लेकिन यही कलम समाज को सही दिशा दिखाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनौतियां झेलते हुए भी सत्यनिष्ठ पत्रकार ही लोकतंत्र की रीढ़ हैं।

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