उत्तराखण्ड
हिमालय की गोद में गूंजेगा “वाहेगुरु” — 23 मई को खुलेंगे श्री हेमकुंड साहिब के कपाट; सेना और ट्रस्ट ने पूरा किया ‘मिशन स्नो
‘अजय सिंह

तैयारियाँ युद्धस्तर पर
भारतीय सेना के जवान और ट्रस्ट के सेवादार पैदल मार्ग पर जमी भारी बर्फ को हटाने में लगे हुए हैं ताकि श्रद्धालुओं के मार्ग सुरक्षित बनें। ट्रस्ट ने कहा कि रास्तों की सफाई, संकेत-मार्किंग और जोखिम-नियंत्रण के काम युद्धस्तर पर किए गए हैं।
ऋषिकेश से पूरी चौकसी
ऋषिकेश से हेमकुंड तक ठहरने, लंगर, चिकित्सा और आपातकालीन रेस्क्यू टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रशासन और ट्रस्ट ने आश्वासन दिया कि सभी आवश्यक सुविधाएँ और बचाव व्यवस्थाएँ तैनात हैं ताकि तीर्थयात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
यात्रा कार्यक्रम की रूपरेखा
20 मई: ऋषिकेश गुरुद्वारा साहिब से ‘पंच प्यारों’ की अगुवाई में पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाई जाएगी; वीआईपी उपस्थित रहेंगे।
21 मई: प्रथम जत्था गोविंद घाट पहुंचेगा।
22 मई: संगत गोविंद धाम में रात्रि विश्राम करेगी।
23 मई: कपाट खुलने के साथ मुख्य यात्रा उद्घाटित होगी।
भव्य सज्जा और धार्मिक अनुष्ठान
कपाट खुलने के पावन अवसर पर मुख्य गुरुद्वारा परिसर को करीब 350 किलोग्राम ताजे फूलों से सजाया जाएगा। ट्रस्ट ने कहा कि सभी प्रमुख पड़ावों के गुरुद्वारों का नवीनीकरण और संवर्द्धन कर दिया गया है ताकि यह यात्रा और अधिक आध्यात्मिक व भव्य हो।
प्रशासन और ट्रस्ट की अपील
ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों से आग्रह किया है कि वे पर्वतीय मौसम को ध्यान में रख कर यात्रा की योजना बनाएं। सरकारी सुरक्षा दिशानिर्देश और स्वास्थ्य नियमों का पालन करना अनिवार्य रहेगा ताकि यह आध्यात्मिक सफर सुरक्षित और सुगम रहे।
