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उत्तराखण्ड

सरलीकरण, समाधान, निस्तारण” की मुहर,,

पवनीत सिंह बिंद्रा

हल्द्वानी,, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जिले के सभी तहसीलों में राजस्व, विरासतन और नागरिक प्रमाण पत्र जैसे तीन मुख्य अभियान शुरू करके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “सरलीकरण, समाधान और निस्तारण” के मूल मंत्र को जमीनी स्तर पर चरितार्थ किया है।

गत 14 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 की अवधि में जिले की 9 तहसीलों में करीब 7311 विरासतन मामलों में 22190 परिवारों को उनकी भूमि के विरासतन नामांतरण का लाभ दिया गया, जो लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण में ऐतिहासिक कदम है।

राजस्व प्रवर्तन समिति का अभूतपूर्व कामराजस्व प्रवर्तन समिति ने जिले भर में मेड़–सीमा विवाद, सीमांकन, पैमाइश, अतिक्रमण हटाने आदि जैसे सालों पुराने मामलों को मौके पर जाकर निस्तारित किया।

इस दौरान कुल 2528 राजस्व वाद–प्रकरणों का निपटारा किया गया, जिससे ग्रामीणों से जुड़े भू–विवाद और लंबित राजस्व मामलों में तेजी आई और दफ्तरों के चक्कर कम हुए। जन्म–मृत्यु प्रमाण पत्र: जीरो पेंडेंसीप्रमाण पत्रों के लिए “दफ्तर–चक्कर” से त्रस्त लोगों को राहत देने के लिए ग्रामीण व शहरी दोनों स्तरों पर विशेष अभियान चलाए गए।

ग्रामीण क्षेत्रों में 2543 जन्म प्रमाण पत्र और 1920 मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत किए गए, जबकि शहरी निकायों में 3660 जन्म और 1941 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए; वर्तमान में इन प्रमाण पत्रों की लंबित संख्या लगभग शून्य है, जितने मामले बचे हैं वे अभी निकाय–बोर्ड के निर्णय अधीन हैं। जनता के बीच समाधान की दृष्टिजिलाधिकारी रयाल ने जनता के आवेदनों के त्वरित निस्तारण, मौके पर जाकर विवाद सुलझाने और ई‑ऑफिस/डिजिटल प्रक्रियाओं में तेजी लाने पर जोर दिया है।

उनका कहना है कि लंबित प्रकरणों का जल्द निस्तारण और पारदर्शी व्यवस्था ही आधारभूत शासन–सुधार का अंग है, और चार महीने में मिले सकारात्मक परिणाम से प्रेरित होकर ये अभियान आगे भी निरंतर “अंतिम व्यक्ति” तक लाभ पहुंचाने के लक्ष्य से जारी रहेंगे।

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