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उत्तराखण्ड

सड़क सुरक्षा अभियान सिर्फ औपचारिकता? नियमों को चुनौती देते ओवरलोड और बिना पहचान वाले वाहन

रामनगर-छोई क्षेत्र में परिवहन विभाग द्वारा समय-समय पर सड़क सुरक्षा सप्ताह और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, जिन पर लाखों रुपये प्रचार-प्रसार में खर्च किए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

क्षेत्र में नदी से निकलने वाले कई खनन एवं मालवाहक वाहन बिना स्पष्ट नंबर प्लेट, बिना रिफ्लेक्टर और बिना आवश्यक चेतावनी संकेतों के सड़कों पर दौड़ते दिखाई देते हैं। इन वाहनों में क्षमता से अधिक भार लादा जाता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कई वाहनों के पीछे ऐसे कोई संकेत नहीं होते जिनसे पीछे चल रहे वाहन चालक को ब्रेक लगाने या वाहन के मुड़ने की जानकारी मिल सके।

परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा समय-समय पर जांच अभियान चलाकर कार्रवाई किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन इन वाहनों की स्थिति देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर नियमों का पालन कौन सुनिश्चित कर रहा है। यदि नंबर प्लेट तक स्पष्ट नहीं है तो ऐसे वाहनों की पहचान और निगरानी कैसे संभव है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों की अनदेखी से न केवल सड़क सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी रहती है। इससे यह संदेश जाता है कि कुछ वाहन संचालकों को नियमों के पालन में छूट मिली हुई है, जिसके चलते उनके हौसले बुलंद हैं।

सड़क सुरक्षा केवल अभियान चलाने से नहीं, बल्कि नियमों के प्रभावी अनुपालन और लगातार निगरानी से सुनिश्चित हो सकती है। ऐसे में संबंधित विभागों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि सड़क पर चलने वाले आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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