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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी में बिना सूचना स्मार्ट मीटर लगाने पर लोगों में रोष; बुजुर्ग का पुराना मीटर तोड़कर फेंका जाने का आरोप

हल्द्वानी — शहर के कई इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने के कार्य के दौरान स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखा गया है। आरोप है कि अडानी समूह के ठेकेदारों ने सरकारी डिस्कॉम की ओर से बिना पहले सूचित किए और उचित प्रक्रिया अपनाए पुराने मीटर हटाए तथा कुछ मामलों में मीटर तोड़कर फेंक दिए। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि उनके घर का पुराना मीटर तोड़ कर फेंक दिया गया, जिससे परिवार में भय और आक्रोश का माहौल बन गया।

ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं का कहना है कि कार्य में लगी टीम अक्सर 10-12 लोगों के समूह में आते है और आक्रामक रवैया अपनाते है, जिससे कई परिवारों को धमकाया गया महसूस हुआ। स्थानीय निवासियों ने यह भी शिकायत की है कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद उनकी सुरक्षा (सिक्योरिटी) का स्पष्ट हिसाब नहीं दिया जा रहा है तथा यह सुरक्षा राशि भविष्य के बिजली बिलों में जुड़कर उनसे वसूली जा सकती है, परन्तु इसका कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं मिला है। यूपीसीएल/डिस्कॉम की भूमिका पर सवाल स्थानीय सूत्रों के मुताबिक यह मीटर यूपीसीएल/डिस्कॉम द्वारा लगवाए जा रहे हैं, जबकि कार्य अडानी समूह के कांट्रैक्टरों के माध्यम से कराया जा रहा है। इस तथ्य ने जिम्मेदारी और जवाबदेही के प्रश्न खड़े कर दिए हैं कि किसे उपभोक्ता शिकायतों का जवाबदेही लेनी चाहिए — यूपीसीएल, अडानी समूह, या स्थानीय बिजली अधिकारियों को।

निवासियों की मुख्य शिकायतें बिना पूर्व सूचना और सहमति के मीटर हटाना/बदलना। टीम का आक्रामक व्यवहार और धमकाने की घटनाएँ। पुरानी सिक्योरिटी डिपॉज़िट का लेखा-जोखा उपलब्ध न होना।।नई स्मार्ट मीटर के कारण बिलों में अतिरिक्त शुल्क जुड़ने की आशंका। स्थानीय अधिकारियों की प्रतिक्रिया

जब इस संबंध में यूपीसीएल/डिस्कॉम और अडानी समूह से प्रतिक्रिया माँगी गयी, तो उन्होंने प्रारम्भिक बयान में कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर और पारदर्शी ऊर्जा उपयोग की जानकारी देना है तथा मीटर स्वैपिंग प्रक्रिया आवश्यक तकनीकी कारणों से की जा रही है। दोनों पक्षों ने यह भी कहा कि किसी भी तरह की बदसलूकी या अनावश्यक तोड़-फोड़ की सूचना मिलते ही जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। आधिकारिक रूप से सिक्योरिटी डिपॉज़िट की वापसी और बिल में समायोजन के मुद्दे पर स्पष्ट निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे — हालांकि अभी तक लिखित स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

स्थानीय निवासी संपर्क फॉर्म भरकर और कस्टमर केयर पर लिखित शिकायत दर्ज करवा रहे हैं। कई प्रभावित परिवार थाना में भी दावा दर्ज कराने पर विचार कर रहे हैं। कुछ उपभोक्ता समूह और नागरिक संगठन इस मुद्दे को लेकर स्थानीय मीडिया और जनप्रतिनिधियों को भी अवगत करा रहे हैं ताकि व्यापक जांच और शीघ्र समाधान हो सके।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने या धमकाने के मामलों में पुलिस शिकायत की वैधता है और उपभोक्ताओं को अपने पुराने मीटर के बदले उचित मुआवजे या सिक्योरिटी रिफंड की माँग का अधिकार है। यदि डिस्कॉम द्वारा सिक्योरिटी ली गयी थी तो उसके रिफंड/समायोजन के नियम उपभोक्ता अधिकारों के अंतर्गत लागू होंगे।

हल्द्वानी में स्मार्ट मीटर परियोजना के तकनीकी लाभों के बावजूद लागू करने के तरीके ने व्यापक संदेह और असंतोष पैदा कर दिया है। उपभोक्ता पारदर्शिता, जिम्मेदारी तय करने और धमकाने जैसी घटनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। इस मामले में उत्तरदायी अधिकारियों का स्पष्ट और लिखित स्पष्टीकरण तथा प्रभावितों को त्वरित राहत बहाल करने की आवश्यकता है।

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