उत्तराखण्ड
इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी से कैंसर उपचार में नई उम्मीदें: डॉ. दिशा तिवारी

हल्द्वानी ,,कैंसर उपचार के क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों ने नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। अब पारंपरिक सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के साथ-साथ इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी जैसी उन्नत उपचार पद्धतियां मरीजों के लिए प्रभावी विकल्प बनकर सामने आई हैं।
maxhealthcare.in� की कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट Dr. Disha Tiwari ने बताया कि इम्यूनोथेरेपी शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर कैंसर कोशिकाओं की पहचान और उन्हें नष्ट करने में मदद करती है। यह उपचार विशेष रूप से फेफड़ों के कैंसर, मेलानोमा, किडनी कैंसर और कुछ प्रकार के लिम्फोमा में बेहतर परिणाम दे रहा है।
उन्होंने कहा कि टार्गेटेड थेरेपी कैंसर कोशिकाओं के विकास और प्रसार के लिए जिम्मेदार विशेष जीन, प्रोटीन और जैविक मार्गों को निशाना बनाती है। इससे सामान्य कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचता है और उपचार अधिक सटीक बनता है। स्तन कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और कुछ रक्त कैंसरों में यह तकनीक विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है।
डॉ. तिवारी के अनुसार, इन आधुनिक उपचारों ने उन्नत चरण के कैंसर मरीजों में जीवन प्रत्याशा बढ़ाने के साथ-साथ उनकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार किया है। साथ ही इनके दुष्प्रभाव पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में अपेक्षाकृत कम होते हैं। उपचार मरीज के कैंसर की विशेषताओं और उसकी जैविक प्रोफाइल के आधार पर तय किया जाता है, जिससे बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि समाज में इन उपचारों को लेकर कई भ्रांतियां भी मौजूद हैं। इम्यूनोथेरेपी हर प्रकार के कैंसर में समान रूप से प्रभावी नहीं होती, जबकि टार्गेटेड थेरेपी की कार्यप्रणाली कीमोथेरेपी से पूरी तरह अलग है। इसलिए किसी भी उपचार का चयन विशेषज्ञ की सलाह और आवश्यक जांचों के बाद ही किया जाना चाहिए।
डॉ. तिवारी ने कहा कि इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी के लिए मरीजों की उपयुक्तता तय करने हेतु बायोमार्कर और जेनेटिक परीक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लगातार चल रहे शोध और क्लीनिकल ट्रायल्स के कारण इन उपचारों का दायरा बढ़ रहा है और कई मामलों में इन्हें अन्य उपचारों के साथ मिलाकर बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा रहे हैं।
