उत्तराखण्ड
विश्व स्तनपान सप्ताह का शुभारंभ, नवजात के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्तनपान अपनाने का आह्वान



मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने कहा कि मां का दूध नवजात शिशु के लिए प्रकृति का सर्वोत्तम, सुरक्षित और संपूर्ण आहार है। यह शिशु को आवश्यक पोषण प्रदान करने के साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है तथा डायरिया, निमोनिया, कुपोषण और अन्य संक्रमणों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि जन्म के बाद पहले छह माह तक केवल मां का दूध ही शिशु के समुचित शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए पर्याप्त होता है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक नवजात को जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने और जन्म के तुरंत बाद स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट सुनिश्चित करने पर विशेष बल दे रहा है। छह माह पूरे होने के बाद शिशु को आयु के अनुरूप सुरक्षित एवं पौष्टिक ऊपरी आहार शुरू करने के साथ-साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।
अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ताओं द्वारा धात्री महिलाओं और उनके परिवारजनों को यह भी समझाया जा रहा है कि जन्म के बाद नवजात को घुट्टी, शहद, पानी अथवा किसी भी प्रकार का प्री-लैक्टियल फीड न दें तथा बिना चिकित्सकीय सलाह के डिब्बाबंद दूध का उपयोग करने से बचें। साथ ही नियमित स्तनपान से माताओं के स्वास्थ्य को होने वाले लाभ और प्रसव के बाद शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की जानकारी भी दी जा रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने जनपदवासियों से अपील की कि प्रत्येक नवजात को जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत देने के लिए स्तनपान को प्राथमिकता दें तथा स्वास्थ्य विभाग के जनजागरूकता अभियान में सक्रिय सहयोग करें



