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उत्तराखण्ड

देहरादून में आधी रात को ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’: कुल्हाल सीमा पर टकराव के बाद छावनी में बदला शहर, खुफिया एजेंसियां अलर्ट


अजय सिंह
देहरादून: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा (कुल्हाल बॉर्डर) पर गुरुवार रात उस समय सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई, जब लगभग 300 निहंग सिखों का एक जत्था पुलिस बैरिकेडिंग को पार कर उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर गया। सीमा पर शुरुआती दौर में उन्हें रोकने के प्रयास विफल होने के बाद पुलिस और खुफिया तंत्र ने पूरे देहरादून जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया। हालांकि, देर रात जिला प्रशासन और निहंगों के प्रतिनिधियों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है।
रेसकोर्स गुरुद्वारे में मैराथन बैठक; अधिकांश निहंग वापस लौटने को सहमत
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए देहरादून के रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारे में प्रशासनिक अधिकारियों और निहंग प्रतिनिधियों के बीच देर रात तक गहन वार्ता हुई। जिलाधिकारी आशीष चौहान ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि यह बातचीत पूरी तरह सफल रही और जत्थे के अधिकांश लोग वापस लौटने पर सहमत हो गए।
दूसरी ओर, कुछ निहंगों के चुपचाप शहर में प्रवेश करने की खुफिया इनपुट के बाद एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के निर्देश पर पूरे शहर में सघन चेकिंग अभियान और नाकेबंदी तेज कर दी गई है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह? (कर्णप्रयाग-रुद्रप्रयाग प्रकरण)
यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में चमोली जिले के कर्णप्रयाग और नगरासू (रुद्रप्रयाग) क्षेत्र में स्थानीय नागरिकों और निहंगों के बीच हुए हिंसक टकराव की पृष्ठभूमि से जुड़ा है:
16 जून की घटना: कर्णप्रयाग में वाहन पार्किंग को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ था, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया।
तलवार से हमला और गिरफ्तारी: आरोप है कि झड़प के दौरान निहंगों द्वारा किए गए तलवार के वार से एक स्थानीय युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने भी जवाबी हमला किया। इस मामले में पुलिस ने चार निहंगों को गिरफ्तार किया था।
एकतरफा कार्रवाई का आरोप: निहंग पक्ष का तर्क है कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा इस पूरे मामले में एकतरफा वैधानिक कार्रवाई की गई है।
बॉर्डर पर बेनतीजा रही थी पहली वार्ता, तैनात करना पड़ा दंगा नियंत्रण बल
इससे पूर्व, गुरुवार शाम को हिमाचल के पांवटा साहिब की ओर से आ रहे इस जत्थे को कुल्हाल बॉर्डर पर ही रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बातचीत की गई थी, जो बेनतीजा रही। इसके बाद जत्थे द्वारा बैरिकेडिंग तोड़े जाने की खबर मिलते ही प्रेमनगर क्षेत्र में भारी पुलिस बल, दंगा नियंत्रण वाहन (Vajra) और वाटर कैनन तैनात कर दिए गए। सुरक्षा के मद्देनजर मुख्य मार्ग पर करीब एक घंटे तक यातायात को भी पूरी तरह रोक दिया गया था।
रात के समय शिमला बाईपास तिराहे, रिस्पना पुल और जोगीवाला क्षेत्रों में संदिग्ध वाहनों की आवाजाही की सूचना पर पुलिस टीमें रातभर अलर्ट मोड पर रहीं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कड़ा रुख: “कानून से ऊपर कोई नहीं”
इस पूरे घटनाक्रम पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि नगरासू प्रकरण में कानून पूरी निष्पक्षता और कठोरता के साथ अपना काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री का वक्तव्य:
“राज्य की कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले या कानून हाथ में लेने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। चारधाम और श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यकता पड़ी, तो सरकार जल्द ही नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी लागू करेगी।”
वर्तमान में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन एहतियातन सभी संवेदनशील धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल की निगरानी जारी है।

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News Reporter - Khalsa News Nation

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