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उत्तराखण्ड

हरेला मेले का भव्य आगाज, लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

 

हल्द्वानी, 12 जुलाई। हीरानगर स्थित पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच में रविवार को पांच दिवसीय हरेला मेले का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। गोल्ज्यू देवता के पूजन से शुरू हुए इस आयोजन में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगीतों और पर्यावरण संरक्षण का संदेश एक साथ देखने को मिला। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, संस्कृति प्रेमी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

मेले का उद्घाटन मंच के संरक्षक एवं राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष हुकुम सिंह कुंवर तथा मंच अध्यक्ष खड़ग सिंह बगड़वाल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, हरियाली के संवर्धन और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों के इस दौर में हरेला का संदेश पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने अधिक से अधिक पौधारोपण, जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच वर्षों से हरेला मेले के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को संरक्षित करने का कार्य कर रहा है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है।

उद्घाटन के बाद पारंपरिक संस्कार गीतों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। बच्चों के लिए छह से 13 वर्ष आयु वर्ग की एकल लोकगीत प्रतियोगिता तथा कनिष्ठ वर्ग की समूह लोकनृत्य प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने पारंपरिक वेशभूषा और लोकधुनों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या मेले का मुख्य आकर्षण रही। प्रसिद्ध लोकगायिका बबीता देवी ने कुमाऊंनी भजनों और लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने “दम-दम डमरू बाजे रे माला मेरे शिव शंकर”, “गंगा जी की जागर” और “राजुला-मालूशाही” जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं लोकगायक पुष्कर मेहरा ने “ऐजा मेरा दानपुरा, पीजा ठंडो पानी” सहित कई लोकप्रिय कुमाऊंनी गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को देर तक झूमने पर मजबूर कर दिया।

आयोजकों ने बताया कि 16 जुलाई तक चलने वाले इस पांच दिवसीय मेले में लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रतियोगिताओं के अलावा कवि सम्मेलन, सांस्कृतिक संध्याएं, पारंपरिक खेल, बच्चों के कार्यक्रम और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। मेले का उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपनी लोक विरासत से जोड़ना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

गोल्ज्यू देवता के पूजन में हुकुम सिंह कुंवर एवं उनकी पत्नी बीना कुंवर, मंच अध्यक्ष खड़ग सिंह बगड़वाल एवं उनकी पत्नी गीता बगड़वाल ने यजमान की भूमिका निभाई। इस अवसर पर मंच के सचिव देवेंद्र तोलिया, कोषाध्यक्ष त्रिलोक बनोली, शोभा बिष्ट, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष हेमंत बगड़वाल, पुष्पा संभल, विमला सांगुड़ी, हरीश सिंह मेहता, चंद्रशेखर परगांई, बृजमोहन बिष्ट, संदीप भैसोड़ा, एल.डी. पांडे, धर्म सिंह बिष्ट, रितिक आर्या, कमल किशोर, मीमांसा आर्या, विपिन बिष्ट, तरुण नेगी, पंकज सुयाल, चंद्रेश, भुवन जोशी ।एन.बी. गुणवंत सहित मंच के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

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