उत्तराखण्ड
गुरु हरिकिशन साहिब के प्रकाश पर्व पर सजा भव्य कीर्तन दरबार, गुरबाणी से निहाल हुई संगत




समागम का शुभारंभ श्री सुखमनी साहिब के पाठ से हुआ। इसके बाद फिरोजपुर से पधारे भाई भूपिंदर सिंह जी फिरोजपुरी एवं उनके जत्थे ने “श्री हरिकिशन धियाइये, जिस डिट्ठे सब दुख जाए” तथा “सो सतगुरु प्यारा मेरे नाल है” सहित विभिन्न गुरबाणी शबदों का मधुर कीर्तन कर संगत को गुरु रस से निहाल किया।
इस अवसर पर प्रचारक भाई अमरीक सिंह जी (बॉम्बे वाले) ने गुरु हरिकिशन साहिब जी के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने मात्र आठ वर्ष की आयु में गुरुगद्दी संभालकर मानव सेवा, करुणा, समानता और निस्वार्थ सेवा की अद्वितीय मिसाल कायम की। दिल्ली में चेचक और हैजा जैसी महामारी के दौरान उन्होंने बिना किसी भेदभाव के पीड़ित मानवता की सेवा की। इसी कारण उन्हें श्रद्धापूर्वक ‘बाला प्रीतम’ के नाम से भी याद किया जाता है।
उन्होंने संगत से गुरु हरिकिशन साहिब जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और मानवता की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहने का आह्वान किया।
समागम के दौरान गुरु का अटूट लंगर भी निरंतर चलता रहा, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर श्रद्धापूर्वक लंगर ग्रहण किया। पूरे गुरुद्वारा परिसर में गुरबाणी, सेवा और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अमरीक सिंह ने समस्त संगत, रागी जत्थे, सेवादारों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। आयोजन में हरविंदर सिंह आनंद, रंजीत सिंह कोहली, अमरजीत चड्ढा, मनजीत सिंह, सविंदरपाल सिंह, हरप्रीत सिंह, भूप्रीत सिंह, गगनदीप सिंह, इंदरपाल सिंह, अर्जुन, बलवंत सिंह, जसप्रीत चड्ढा, सुरिंदर सिंह, गुरबचन सिंह सहित अनेक सेवादार उपस्थित रहे।
आयोजन को सफल बनाने में सिख सेवक जत्था एवं श्री सुखमनी साहिब सेवा सोसाइटी के सेवादारों ने सराहनीय सहयोग प्रदान किया।



