उत्तराखण्ड
नैनीताल के विकास व पर्यटन कार्यों पर राज्यपाल ने ली जानकारी, पीरूल प्रबंधन व वनाग्नि रोकथाम पर बल
नैनीताल, 19 मई, 2026।
मुख्य विकास अधिकारी ने राज्यपाल को बताया कि नैनीताल की पहचान यहां की झीलों (तालों) से है, जिनके सौंदर्यीकरण और स्वच्छता के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए स्थानीय होटल व्यवसायियों के साथ समन्वय स्थापित कर मार्केट लिंकेज की व्यवस्था की गई है। इसके साथ‑साथ युवाओं को स्वरोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
राज्यपाल ने निर्देश दिए कि नैनीताल में नए पर्यटन स्थलों का विकास किया जाए और पर्यटकों को अधिक समय तक आकर्षित रखने के लिए विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग पर विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि इन उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंच मिल सके।
इसी दौरान राज्यपाल ने डीएफओ नैनीताल आकाश गंगवार से वन विभाग की गतिविधियों, विशेष रूप से वनाग्नि की घटनाओं और उनकी रोकथाम के उपायों के बारे में जानकारी ली। प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि मानव‑वन्यजीव संघर्ष जनपद की प्रमुख चुनौती है, जिससे बचाव के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग और अन्य सुरक्षा उपाय लोगों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
वनाग्नि नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे पीरूल संग्रहण अभियान के तहत स्थानीय लोगों को पीरूल एकत्र करने पर 10 रुपये प्रति किलोग्राम प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। जनपद में इको‑टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास चल रहे हैं।
राज्यपाल ने नैनीताल में पीरूल प्रबंधन के माध्यम से वनाग्नि रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की और वनाग्नि नियंत्रण तथा मानव‑वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदाय की सहभागिता को और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
