उत्तराखण्ड
राज्यपाल ने की कांवड़ यात्रा व मानसून तैयारियों की समीक्षा, कानून व्यवस्था पर दिए आवश्यक निर्देश


बैठक के दौरान राज्यपाल ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, निर्बाध आवागमन और सुगम यात्रा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस एवं प्रशासन के समन्वित प्रयासों की सराहना की।
राज्यपाल ने मानसून के मद्देनज़र प्रदेश में आपदा प्रबंधन की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्क निगरानी बनाए रखने, किसी भी आपदा या आकस्मिक स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने तथा विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।
इस दौरान सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों के कल्याण से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल ने उनके स्वास्थ्य, पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी लेते हुए कहा कि राज्य और समाज की सेवा में समर्पित पुलिस कर्मियों के सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके सम्मान और कल्याण का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने राज्यपाल को बताया कि 30 जुलाई से प्रारंभ हुई कांवड़ यात्रा 11 अगस्त तक चलेगी। यात्रा के दौरान सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पूरे कांवड़ मेला क्षेत्र को 22 सुपर जोन, 67 जोन और 200 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में 110 अतिरिक्त ड्यूटी प्वाइंट स्थापित किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 11 हजार से अधिक पुलिस एवं सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं तथा 420 सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है।
डीजीपी ने यह भी बताया कि मानसून और आपदा प्रबंधन को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने व्यापक सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था लागू की है। यात्रा मार्गों की सतत निगरानी, मौसम एवं मार्गों की नियमित समीक्षा, त्वरित समन्वय तथा किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सक्रिय रखी गई हैं।



