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उत्तराखण्ड

श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संस्कृत पद्यानुवाद का राज्यपाल ने किया विमोचन

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गुरुवाणी और देववाणी संस्कृत का दिव्य संगम, आने वाली पीढ़ियों के लिए बनेगा प्रेरणा स्रोत’

देहरादून, 11 जुलाई। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने शनिवार को लोक भवन में आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के संस्कृत पद्यानुवाद का विधिवत विमोचन किया। यह श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संस्कृत भाषा में पहला संपूर्ण पद्यानुवाद है, जिसे रामतीर्थ केंद्र, सहारनपुर एवं साहित्याचार्य श्री जयनारायण शास्त्री ‘यात्री’ ने तैयार किया है। यह कार्यक्रम रामतीर्थ केंद्र की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन केवल एक संस्थान की स्वर्ण जयंती का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, ज्ञान-परंपरा और राष्ट्रीय एकात्मता का ऐतिहासिक पर्व है। उन्होंने कहा कि गुरुवाणी और देववाणी संस्कृत का यह दिव्य संगम भारत की सांस्कृतिक एकता, आध्यात्मिक संवाद और सामाजिक समरसता का सशक्त प्रतीक है।

राज्यपाल ने कहा कि आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के गहन संदेशों को समझकर उन्हें जीवन में आत्मसात करना तथा उनके ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि संस्कृत पद्यानुवाद भारतीय ज्ञान-परंपरा, साहित्य और अध्यात्म के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह केवल शब्दों का अनुवाद नहीं, बल्कि गुरुवाणी की दिव्य चेतना और संस्कृत की शाश्वत ज्ञानधारा का अद्भुत समन्वय है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अध्ययन, शोध और प्रेरणा का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

राज्यपाल ने इस ऐतिहासिक कृति के लिए साहित्याचार्य जयनारायण शास्त्री ‘यात्री’ की दशकों की साधना और विद्वत्ता की सराहना करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से यह अद्वितीय कार्य संभव हो सका। उन्होंने आचार्य सर्वेश्वर नाथ प्रभाकर, आचार्य गंगेश्वर नाथ प्रभाकर, डॉ. आभा प्रभाकर तथा संपूर्ण संपादकीय मंडल के योगदान की भी प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि दस्तावेजीकरण और प्रकाशन केवल अभिलेखन नहीं, बल्कि सभ्यता की सामूहिक स्मृतियों के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। राज्यपाल ने रामतीर्थ केंद्र परिवार तथा इस ऐतिहासिक कृति के निर्माण से जुड़े सभी विद्वानों और सहयोगियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल, त्रिमूर्ति धाम कालका के संस्थापक ब्रह्मऋषि अमरदास जी महाराज, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, गौ सेवा मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी कृष्णानंद जी महाराज, रामतीर्थ केंद्र के अध्यक्ष आचार्य सर्वेश्वर नाथ प्रभाकर, प्रमुख सचिव न्याय अमित कुमार सिरोही, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार,

उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष बलजीत सोनी, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल सहित अनेक संत-महात्मा, विद्वान, आचार्य, शोधार्थी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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