उत्तराखण्ड
सोबन सिंह जीना विवि के प्रथम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को दी बधाई; शिक्षा में शोध, नवाचार व संस्कृति को जोड़ा जाए

राज्यपाल ने अल्मोड़ा की पवित्र धरती को सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और वैचारिक चेतना का केंद्र बताते हुए कहा कि कसार देवी, गोलू देवता, बाबा नीब करौरी तथा माँ नंदा-सुनंदा की आध्यात्मिक ऊर्जा से समृद्ध यह क्षेत्र सदियों से राष्ट्र को दिशा देता रहा है। उन्होंने महान राष्ट्रवादी जननायक स्वर्गीय सोबन सिंह जीना को नमन करते हुए कहा कि उनके नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध व नवाचार में नए मानक स्थापित कर रहा है।
उन्होने विश्वविद्यालय द्वारा ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ के अनुरूप पारंपरिक ज्ञान, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों की प्रशंसा की। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र, हैप्पीनेस लैब, हरेला पीठ तथा लक्ष्मी देवी टम्टा केंद्र जैसे नवाचारों को विद्यार्थियों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण बताया और विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय समझौते, शोध कार्यों तथा पेटेंट सफलताओं की भी सराहना की।
शोध पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शोध केवल पुस्तकों व प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम होना चाहिए। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि, जड़ी-बूटी, जल संरक्षण तथा स्थानीय चुनौतियों के समाधान हेतु शोध को उपयोगी बनाने का आह्वान किया। साथ ही राज्यपाल ने साइबर सुरक्षा व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे आधुनिक विषयों पर विश्वविद्यालय की पहल को समयानुकूल व दूरदर्शी बताया।
प्रदेश की बेटियों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोहों में पदक विजेताओं में बड़ी संख्या में छात्राएँ होने पर प्रदेश को गर्व है और महिलाओं की भागीदारी विकसित भारत के निर्माण में निर्णायक होगी। उन्होंने खेल व सैन्य क्षेत्र में उत्तराखण्ड के युवाओं की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे विकसित भारत @2047 के न केवल साक्षी बल्कि सारथी भी हैं। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, नवाचार अपनाने और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के साथ राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने युवाओं से पहाड़ की जवानी व पानी को प्रदेश के विकास से जोड़ने, रोजगार देने वाले उद्यमी बनने तथा जैविक कृषि, जड़ी-बूटी, पर्यटन व स्टार्टअप्स के माध्यम से पलायन रोकने की अपील की।
राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण को उत्तराखण्ड का प्राकृतिक व आध्यात्मिक दायित्व बताते हुए हिमालय, नदियों और वनों के संरक्षण पर जोर दिया। अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से जीवनभर सीखते रहने, सत्य व धर्म के मार्ग पर चलने तथा राष्ट्रसेवा को जीवन का ध्येय बनाने का आह्वान किया और विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भारत का गौरव दुनिया के मंच पर और ऊंचा करेंगे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, शिक्षकगण, विशिष्ट अतिथिगण, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।
