उत्तराखण्ड
शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर, आरटीई प्रवेशों की जांच के निर्देश

समीक्षा बैठक में आयुक्त ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आरटीई के तहत केवल पात्र बच्चों को ही प्रवेश मिले, इसके लिए राजस्व विभाग द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र, आयकर रिटर्न और अन्य संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच सुनिश्चित की जाए।
बैठक के दौरान अपर निदेशक गजेन्द्र सिंह सौन ने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) 2.0 रिपोर्ट में उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य विद्यालयी शिक्षा की रैंकिंग में 24वें स्थान से उछाल लेकर 15वें स्थान पर पहुंच गया है, जो प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
उन्होंने बताया कि कुमाऊं मंडल में वर्तमान में 1,107 राजकीय हाईस्कूल एवं इंटर कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें 424 हाईस्कूल तथा 683 इंटर कॉलेज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त मंडल में 41 अटल उत्कृष्ट विद्यालय, 94 पीएम श्री विद्यालय तथा विभिन्न क्लस्टर विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं।
आयुक्त दीपक रावत ने समीक्षा के दौरान विशेष रूप से उन विद्यालयों पर ध्यान देने को कहा जहां निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहे हैं या जहां आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे सभी विद्यालयों में भवन निर्माण, पेयजल, शौचालय, फर्नीचर और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके।
बैठक में शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति, विद्यालयों की स्थिति तथा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने से संबंधित विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। आयुक्त ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए विद्यालयों में बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
