उत्तराखण्ड
भीमताल में भोजनमाताओं का प्रदर्शन, सेवा सुरक्षा और सम्मान की मांग को लेकर डीईओ कार्यालय पर प्रदर्शन
पवनीत सिंह बिंद्रा

प्रदर्शन के दौरान संगठन की अध्यक्ष शारदा ने कहा कि भोजनमाताएं वर्षों से विद्यालयों में बच्चों को मातृत्व भाव के साथ स्वच्छ एवं पौष्टिक मध्यान्ह भोजन उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन आज भी उन्हें न तो सेवा सुरक्षा मिली है और न ही उनके कार्य के अनुरूप सम्मान एवं अधिकार।
संगठन की प्रचार मंत्री चंपा गिनवाल ने कहा कि कई विद्यालयों में भोजनमाताओं को बिना ठोस कारण के कार्य से हटा दिया जाता है। शासनादेश में भोजनमाताओं को हटाने का प्रावधान उनके भविष्य को असुरक्षित बनाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भोजनमाताओं से मध्यान्ह भोजन बनाने के अतिरिक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, सफाईकर्मी, माली, चौकीदार तथा अन्य कर्मचारियों के कार्य भी कराए जाते हैं, जो उनके दायित्वों से बाहर हैं।
यूनियन की कार्यकारिणी सदस्य तुलसी ने कहा कि यदि सरकार भोजनमाताओं से अतिरिक्त कार्य कराती है तो उसके लिए अलग से उचित मानदेय दिया जाए। यदि नियमित रूप से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के दायित्व निभाए जा रहे हैं तो भोजनमाताओं को उसी के अनुरूप वेतन, सुविधाएं अथवा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा प्रदान किया जाए।
ब्लॉक कमेटी सदस्य विमला ने कहा कि चुनाव ड्यूटी के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए भोजन तैयार कराया जाता है, लेकिन कई स्थानों पर उसका भुगतान मनमाने तरीके से किया जाता है। उन्होंने मांग की कि चुनाव ड्यूटी, समर कैंप और अन्य अतिरिक्त कार्यों का भुगतान सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाए।
वहीं लालकुआं ब्लॉक कमेटी की अध्यक्ष बसंती ने 2 फरवरी की वैधानिक हड़ताल के कारण काटे गए मानदेय का तत्काल भुगतान किए जाने की मांग उठाई।
संगठन ने जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की कि भोजनमाताओं की सभी समस्याओं और मांगों पर अपना लिखित अभिमत शासन को भेजा जाए तथा उसकी प्रति संगठन को भी उपलब्ध कराई जाए।
प्रगतिशील भोजनमाता संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी न्यायोचित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो पूरे प्रदेश में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन में लालकुआं, हल्द्वानी और रामनगर क्षेत्र की भोजनमाताओं ने भाग लिया। इनमें पुष्पा, तुलसी, विमला, मंजू, बसंती, चंपा गिनवाल, नंदी, हंसी, गीता, आनंदी, नंदी देवी, शांति, दया, सरस्वती सहित बड़ी संख्या में भोजनमाताएं मौजूद रहीं।
