उत्तराखण्ड
कारगिल की धरती से बाल शतरंज खिलाड़ी तेजस ने लिया राष्ट्रसेवा का संकल्प



हल्द्वानी द्रास,,कारगिल विजय दिवस के अवसर पर हल्द्वानी के युवा शतरंज खिलाड़ी तेजस तिवारी ने द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल पहुँचकर देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस यात्रा ने उनके भीतर राष्ट्रप्रेम और देश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का नया संकल्प जगाया।
महज साढ़े आठ वर्ष की आयु में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुके तेजस ने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों की शौर्यगाथाओं को निकट से जानना उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव है। उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य शतरंज की बिसात पर भारत का नाम और अधिक ऊँचा करना है।
25 जुलाई को आयोजित ‘शौर्य संध्या’ में दीप प्रज्ज्वलित कर उन्होंने वीर बलिदानियों को नमन किया, जबकि 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के मुख्य समारोह में शामिल होकर शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। समारोह में भारतीय सेना के जोशीले उद्घोष और देशभक्ति के माहौल ने उन्हें गहराई से प्रेरित किया।
तेजस पहले ही कम उम्र में फिडे रेटिंग प्राप्त कर अपनी पहचान बना चुके हैं। उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है और वे भारत के 23 राज्यों की यात्रा के साथ 14 राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिताओं तथा अनेक फिडे रेटेड टूर्नामेंटों में भाग ले चुके हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने मलेशिया में आयोजित कॉमनवेल्थ शतरंज चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।
तेजस के पिता शरद तिवारी ने बताया कि बच्चों को केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें देश के इतिहास, वीर सैनिकों के बलिदान और राष्ट्रीय मूल्यों से भी जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि द्रास की यात्रा का उद्देश्य नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और कर्तव्यबोध की भावना को मजबूत करना था।
कारगिल की पावन धरती से लौटे तेजस अब अपने खेल के माध्यम से देश का गौरव बढ़ाने के लिए और अधिक मेहनत करने का संकल्प लेकर लौटे हैं।


