उत्तराखण्ड
संस्थागत वित्तीय प्रबंधन पर क्षमता वर्धन कार्यशाला संपन्न, ऑडिट की बारीकियों पर हुआ मंथन

हल्द्वानी,,विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं अकादमिक ढांचे को अधिक पारदर्शी, कुशल और वित्तीय रूप से सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से बुधवार को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र (CIQA) द्वारा “संस्थागत वित्तीय प्रबंधन: बिल प्रस्तुतीकरण, लेखा परीक्षा और आपत्ति निराकरण” विषय पर क्षमता वर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया।
माननीय कुलपति की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में सीआईक्यूए के निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रक्रियाओं की बेहतर समझ संस्थान की प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही को मजबूत बनाती है।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. ए.के. दीक्षित, पूर्व उपनिदेशक, स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग, इलाहाबाद ने बिलों के सही प्रस्तुतीकरण, लेखा परीक्षा की प्रक्रियाओं तथा ऑडिट के तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं की अपर्याप्त जानकारी के कारण अक्सर ऑडिट आपत्तियां उत्पन्न होती हैं, जिससे विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है और संस्थान की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
डॉ. दीक्षित ने कहा कि डिजिटल युग में वित्तीय नियमों का शत-प्रतिशत अनुपालन अत्यंत आवश्यक है। यदि बिल प्रस्तुत करते समय निर्धारित दिशा-निर्देशों का सही पालन किया जाए तो अधिकांश ऑडिट आपत्तियों से बचा जा सकता है। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों को वित्तीय आपत्तियों के समयबद्ध एवं तार्किक निराकरण की प्रक्रिया भी समझाई।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति ने वित्तीय साक्षरता, अनुशासन और पारदर्शिता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में केवल अकादमिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और वित्तीय पारदर्शिता भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि सभी नियमित शिक्षकों एवं कार्मिकों की उपस्थिति इसलिए अनिवार्य की गई ताकि भविष्य में वित्तीय प्रक्रियाओं के संबंध में किसी प्रकार की अनभिज्ञता न रहे।
कार्यशाला के अंतिम सत्र में प्रश्नोत्तर एवं शंका समाधान कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने वित्तीय नियमों, टीए/डीए बिलों तथा परचेज ऑर्डर्स से संबंधित प्रश्न मुख्य वक्ता के समक्ष रखे। डॉ. दीक्षित ने सभी जिज्ञासाओं का सरल, व्यावहारिक और विधिक दृष्टिकोण से समाधान किया।
कार्यक्रम के अंत में सीआईक्यूए के अतिरिक्त निदेशक प्रो. गगन सिंह ने कुलपति, मुख्य वक्ता डॉ. ए.के. दीक्षित तथा सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के सभी नियमित शिक्षक, विभागाध्यक्ष, प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
