Connect with us

उत्तराखण्ड

विश्व पर्यावरण दिवस पर उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में पौधारोपण व पर्यावरण संरक्षण पर मंथन

 

, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण एवं व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, हिमालयी पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि प्रो. बी. एस. कालाकोटी तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. एस. एस. भाकुनी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

पहले सत्र में विश्वविद्यालय परिसर में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण किया गया, जिसमें शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसके बाद विज्ञान भवन में आयोजित व्याख्यान सत्र में करीब 68 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम समन्वयक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. हरीश चन्द्र जोशी ने पर्यावरणीय संसाधनों की गुणवत्ता और उपलब्धता को मानव समाज तथा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। वहीं विद्याशाखा के निदेशक प्रो. पी. डी. पंत ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया।

निदेशक सीका प्रो. गिरिजा पांडे ने कहा कि सामाजिक सोच और मानवीय व्यवहार पर्यावरण को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने वैश्विक संघर्षों और बढ़ती पर्यावरणीय विषाक्तता पर चिंता जताते हुए सतत विकास के लिए मूल कारणों के समाधान पर जोर दिया।

अपने व्याख्यान में डॉ. एस. एस. भाकुनी ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती भूकंपीय गतिविधियों, भ्रंशों और उनसे उत्पन्न नई पर्यावरणीय चुनौतियों पर प्रकाश डाला। वहीं मुख्य वक्ता प्रो. बी. एस. कालाकोटी ने कहा कि मानव गतिविधियों के कारण प्रकृति का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने, वनस्पतियों में बदलाव और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधारोपण तक सीमित न रहकर वृक्षों के संरक्षण तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान को पर्यावरण संरक्षण अभियानों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

ADVERTISEMENTS Ad

More in उत्तराखण्ड

Trending News

Follow Facebook Page