उत्तराखण्ड
रुद्रपुर में ऐक्टू का नगर सम्मेलन संपन्न, श्रम कानूनों और मजदूरों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

सम्मेलन को संबोधित करते हुए ऐक्टू के राज्य महामंत्री केके बोरा ने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरों की वास्तविक मजदूरी लगातार घट रही है। उन्होंने कहा कि पुराने 44 श्रम कानूनों की जगह लागू किए गए चार नए लेबर कोड से श्रमिकों का शोषण बढ़ा है और कई स्थानों पर मजदूरों से बिना ओवरटाइम भुगतान के 12-12 घंटे काम कराया जा रहा है।
जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी ने कहा कि विभिन्न राज्यों में मजदूरी बढ़ाए जाने के बावजूद यह महंगाई के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। उन्होंने न्यूनतम मासिक वेतन 42 हजार रुपये किए जाने की मांग दोहराते हुए सिडकुल क्षेत्र में श्रमिकों के कथित शोषण के खिलाफ मजदूरों से एकजुट होने का आह्वान किया।
जिला सचिव अनीता अन्ना ने कहा कि आशा, आंगनबाड़ी, भोजनमाता समेत विभिन्न स्कीम वर्कर्स लंबे समय से राज्यकर्मी का दर्जा और न्यूनतम वेतन दिए जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ा रही है, जबकि उनके पारिश्रमिक में अपेक्षित वृद्धि नहीं की जा रही है।
सम्मेलन में चारों लेबर कोड वापस लेने, श्रमिक आंदोलनों के दौरान गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई, न्यूनतम मासिक वेतन 42 हजार रुपये निर्धारित करने तथा महिला स्कीम वर्कर्स को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने का प्रस्ताव पारित किया गया।
सम्मेलन के दौरान हीरा सिंह राठौर को नगर अध्यक्ष, प्रकाश नेगी को नगर सचिव, कमल सिंह को उपाध्यक्ष तथा प्रकाश बोरा को उप सचिव चुना गया। इसके अलावा निरंजन लाल, कमलेश कार्की, वीरेंद्र सिंह, नमिता सरकार, हेमंत भट्ट और पुष्कर खाती को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया।
कार्यक्रम में अनीता अन्ना, उत्तम दास, गोपाल दत्त तिवारी, मोहन सिंह, रीता कश्यप, आनंद रावत, संदीप हुड्डा, इन्द्रजीत कुमार, विजय शर्मा, कार्तिक सरकार, नरेश कुमार, धीरज, रंजन विश्वास, पंकज जोशी, केहरी सिंह, जसवंत सिंह, दानवीर सिंह, दूधनाथ भारती, ललित मटियाली, संतोष गुप्ता सहित बड़ी संख्या में ऐक्टू कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

