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उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की 35वीं बैठक सम्पन्न, छात्रों को मिली बड़ी राहत Writing

पवनीत सिंह बिंद्रा 

। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की 35वीं बैठक विश्वविद्यालय के कुलपति एवं परिषद अध्यक्ष प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, शोध एवं प्रशासनिक कार्यों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया तथा विभिन्न प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गई।

बैठक में विद्या परिषद की 34वीं बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि एवं अनुमोदन के साथ पूर्व में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्यवाही की समीक्षा की गई। परिषद ने शैक्षणिक सत्र जुलाई 2026 से सभी सेमेस्टर आधारित कार्यक्रमों की वार्षिक फीस को सेमेस्टरवार लिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके साथ ही एमबीए एवं एमसीए कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री प्राप्त करने का विकल्प उपलब्ध कराने की संस्तुति भी की गई। इस निर्णय से विद्यार्थियों पर एकमुश्त शुल्क जमा करने का आर्थिक बोझ कम होगा।

बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप विद्यार्थियों को प्रदान किए जाने वाले ट्रांसक्रिप्ट के नए प्रारूप को अनुमोदन हेतु संस्तुत किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय के पांच नए एमओओसी (MOOCs) पाठ्यक्रमों को स्वयं (SWAYAM) पोर्टल पर स्वीकृति मिलने की जानकारी भी साझा की गई, जिस पर परिषद सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त की।

विद्या परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर को भी अपनी संस्तुति प्रदान की। वाणिज्य विभाग के शोधार्थी किरण कुमार तथा इतिहास विभाग के शोधार्थी प्रवीन लखेड़ा की पीएचडी मौखिकी परीक्षा आख्या का अनुमोदन भी किया गया।

बैठक में विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के लिए आवेदन प्राप्त करने की तिथि निर्धारित करने तथा पीएचडी मौखिकी परीक्षा आख्या पर आंतरिक परीक्षक एवं संबंधित निदेशक के हस्ताक्षर अनिवार्य किए जाने संबंधी प्रस्तावों पर भी विचार कर संस्तुतियां प्रदान की गईं।

बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय विश्वविद्यालय की परिनियमावली में संशोधन कर ‘भाषा विद्याशाखा’ (स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज) को शामिल किए जाने का प्रस्ताव रहा। इस पर विस्तृत चर्चा के बाद परिषद ने भाषा विद्याशाखा सहित अन्य विद्याशाखाओं के पुनर्गठन के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया। समिति अपनी रिपोर्ट आगामी बैठक में प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय की विभिन्न विद्याशाखाओं के अंतर्गत सम्पन्न अध्ययन बोर्डों (बोर्ड ऑफ स्टडीज़) की संस्तुतियों को भी परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया।

अध्यक्ष की अनुमति से प्रस्तुत अतिरिक्त प्रस्तावों में जुलाई 2026 सत्र से एमबीए चतुर्थ सेमेस्टर में ‘माइक्रो फाइनेंस’ नामक नया ऐच्छिक पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए जाने तथा विश्वविद्यालय शोध उपाधि अध्यादेश-2026 के अंतर्गत पीएचडी कार्यक्रम की रिक्त सीटों को प्रवेश परीक्षा के माध्यम से भरे जाने संबंधी प्रस्तावों को भी संस्तुति प्रदान की गई।

बैठक ऑनलाइन एवं ऑफलाइन (हाइब्रिड मोड) में आयोजित की गई। बाह्य सदस्यों के रूप में प्रो. एन.सी. पोखरियाल, प्रो. पी.एस. बिष्ट, डॉ. एच.सी. पुरोहित तथा डॉ. मनु प्रताप सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहभागिता की। वहीं विश्वविद्यालय के आंतरिक सदस्यों में कुलसचिव खेमराज भट्ट, वित्त अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह, विभिन्न विद्याशाखाओं के निदेशक, प्रोफेसर एवं परिषद के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक में लिए गए निर्णयों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत बनाने, शोध गतिविधियों के विस्तार तथा विद्यार्थियों को अधिक सुविधाजनक एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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