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उत्तराखण्ड

30 अप्रैल 2026: धामी सरकार पर मजदूरों को धोखा देने का आरोप

रुद्रपुर ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (ऐक्टू) के उत्तराखंड राज्य महामंत्री कॉमरेड के.के. बोरा ने धामी सरकार पर मजदूरों को धोखा देने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार का 28 अप्रैल 2026 को जारी इंजीनियरिंग उद्योग में न्यूनतम वेतन बढ़ोतरी का आदेश 20 साल पुराना है और इसे अंतरिम राहत बताकर मजदूरों के साथ छल किया जा रहा है।

न्यूनतम वेतन वृद्धि को अपर्याप्त बताया

कॉमरेड बोरा ने इस वृद्धि को असंवेदनशील और अपर्याप्त करार दिया। उन्होंने बताया कि हर पांच साल में न्यूनतम वेतन संशोधन होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने 20 साल बाद मात्र 1500 से 2600 रुपये की मामूली बढ़ोतरी की है। यह महंगाई और मुद्रास्फीति से निपटने में पूरी तरह नाकाम है। बोरा ने चेतावनी दी कि यह कदम श्रमिक वर्ग में राहत के बजाय आक्रोश पैदा कर रहा है, जिसका असर आगामी चुनावों में सरकार को भुगतना पड़ेगा।

ILO, श्रम सम्मेलन और सुप्रीम कोर्ट के हवाले से मांग

ऐक्टू नेता ने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के 1970 कन्वेंशन, 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन तथा सुप्रीम कोर्ट के 1992 रेप्टाकोरोस निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि मार्च 2026 तक किसी कामगार का मासिक वेतन 42 हजार रुपये से कम नहीं होना चाहिए। लेकिन हड़ताली मजदूर अभी भी 13 हजार रुपये भी नहीं कमा पा रहे। उन्होंने मांग की कि वर्तमान वेतन को कम से कम दोगुना किया जाना चाहिए था तथा सरकार को हड़तालों में मजदूरों की इच्छा का सम्मान करना होगा।

1 मई पर मजदूर संघर्ष का ऐलान

ऐक्टू ने 1 मई मजदूर दिवस के अवसर पर मजदूर वर्ग को 8 घंटे काम और 42 हजार न्यूनतम वेतन के संकल्प को बुलंद करने का आह्वान किया है। संगठन आगामी संघर्षों में इन मांगों को तेज करेगा।

के.के. बोरा

राज्य महामंत्री, ऐक्टू उत्तराखंड

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