उत्तराखण्ड
हर व्यक्ति को रोजाना खाना चाहिए ये ‘देसी सुपरफूड्स’, स्वस्थ शरीर के लिए हैं बेहद लाभकारी : डॉ. हृदयेश कुमार

महंगे विदेशी खाद्य पदार्थों के बजाय आंवला, दाल, हल्दी, अदरक, बादाम और अलसी जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने की अपील
फरीदाबाद, 6 सितंबर। अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट की ओर से जाट भवन, सेक्टर-3, बल्लभगढ़ में स्वास्थ्य जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. हृदयेश कुमार ने लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा दैनिक खानपान में पौष्टिक एवं प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने के लिए जागरूक किया।
डॉ. हृदयेश कुमार ने कहा कि अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य भारत को स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाते हुए लोगों को बेहतर एवं वास्तविक जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। ट्रस्ट स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शिक्षा को भी विशेष महत्व देता है।
उन्होंने कहा कि अक्सर लोग भरपूर खानपान के बावजूद अस्वस्थ रहते हैं। इसका एक प्रमुख कारण भोजन का सही चयन न कर पाना भी हो सकता है। आज की अव्यवस्थित जीवनशैली और पोषण संबंधी जानकारी के अभाव में लोगों में पोषण की कमी के साथ-साथ विभिन्न बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। ऐसे में महंगे और विदेशी खाद्य पदार्थों के बजाय हमारे घरों और आसपास आसानी से उपलब्ध प्राकृतिक एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन का हिस्सा बनाना जरूरी है।
आंवला और नींबू को आहार में करें शामिल
डॉ. हृदयेश कुमार ने आंवले को भारतीय आहार का महत्वपूर्ण पौष्टिक खाद्य पदार्थ बताते हुए कहा कि इसमें विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। आंवला उपलब्ध न होने पर नींबू का सेवन भी किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मूंग दाल सहित अन्य दालें प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। नियमित रूप से दालों का सेवन शरीर को आवश्यक पोषक तत्व और ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है तथा मांसपेशियों के लिए भी उपयोगी है।
उन्होंने हल्दी और अदरक के महत्व पर भी प्रकाश डाला। हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन और अदरक के प्राकृतिक यौगिक संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। इसी प्रकार बादाम, अखरोट और अलसी जैसे खाद्य पदार्थों में स्वस्थ वसा, फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माने जाते हैं।
डॉ. कुमार ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए खानपान में संतुलन, नियमित दिनचर्या और अपनी जीवनशैली पर नियंत्रण बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने घर से ही खानपान और जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव शुरू करें तो स्वास्थ्य के साथ-साथ अनावश्यक खर्च और समय की भी बचत की जा सकती है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्ति स्वयं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बने।
सेमिनार में आनंद कुमार, डॉ. छतर सिंह रावत, डॉ. महेंद्र भारद्वाज, सुबोध कुमार साह, वेदवीर, नीरज कुमार, मनीषा देवी, विमलेश देवी, शिव शंकर राय, पंडित ओपी गौड़, रवींद्र फौजदार, गोपाल कुमार, राकेश कुमार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी मौजूद रहे।

















