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उत्तराखण्ड

आईआईएम काशीपुर में ‘नवयुग 2026’ का सफल समापन

मानव-एआई तालमेल, कौशल आधारित प्रतिभा और भविष्य की कार्यशैली पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

काशीपुर, 06 सितंबर 2026। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) काशीपुर में 5 सितंबर को प्रमुख सेक्टर कॉन्क्लेव ‘नवयुग 2026: रीइन्वेंटिंग बीएफएसआई’ का सफल आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों, जोखिम रणनीतिकारों, मानव संसाधन विशेषज्ञों और प्रबंधन विशेषज्ञों ने भाग लेकर तेजी से बदलते तकनीकी एवं संगठनात्मक परिदृश्य पर व्यापक चर्चा की।

कॉन्क्लेव का मुख्य फोकस कौशल आधारित एवं एआई-सक्षम कार्यबल मॉडल विकसित करने तथा मानवीय विवेक और मजबूत जोखिम प्रशासन के साथ एंटरप्राइज-ग्रेड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रभावी इस्तेमाल पर रहा।

एआई के साथ मानवीय विवेक जरूरी

कॉन्क्लेव का शुभारंभ ‘द फाइनेंशियल प्रोफेशनल रीइमेजिन्ड’ विषयक सत्र से हुआ। इसमें ऑटोमेशन और तकनीकी बदलावों के बीच नेतृत्व क्षमता, मानव संसाधन रणनीति तथा संगठनात्मक संस्कृति में आवश्यक बदलावों पर विचार-विमर्श किया गया। सत्र का संचालन आईआईएम काशीपुर के एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (स्ट्रैटेजी) डॉ. गुरवीर सिंह जसवाल ने किया।

विशेषज्ञों ने कहा कि एआई विश्लेषणात्मक कार्यों को बेहद कम समय में पूरा करने में सक्षम है। आठ घंटे में किए जाने वाले डेटा विश्लेषण को एआई की मदद से करीब 15 मिनट में पूरा किया जा सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय में मानवीय विवेक, आलोचनात्मक सोच और व्यक्तिगत विश्लेषण क्षमता की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

डिग्री से अधिक कौशल पर जोर

एक्सिस बैंक, आनंद राठी वेल्थ, क्रेडिट सेज़न, एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस और आरबीएल बैंक के मानव संसाधन एवं क्षमता विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि उद्योग जगत अब पारंपरिक डिग्री-केंद्रित नियुक्तियों से आगे बढ़कर कौशल आधारित प्रतिभा मॉडल की ओर बढ़ रहा है।

ट्रेजरी, एक्चुरियल और अंडरराइटिंग जैसे तकनीकी क्षेत्रों के ज्ञान के साथ क्रिटिकल थिंकिंग, सहयोग, संवाद और संबंध प्रबंधन जैसी मानवीय क्षमताओं को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार एआई आधारित भर्ती प्रक्रियाओं के दौर में मौलिक सोच, प्रामाणिकता, विश्वास निर्माण और वास्तविक संबंध प्रबंधन जैसी क्षमताओं की अहमियत और बढ़ेगी।

असंरचित डेटा को उपयोगी इंटेलिजेंस में बदलना बड़ी चुनौती

दूसरे सत्र ‘द इंटेलिजेंट फाइनेंशियल एंटरप्राइज’ में संस्थागत बदलाव, कॉर्पोरेट रणनीति, क्रेडिट जोखिम संरचना और डिजिटल स्केलेबिलिटी पर चर्चा हुई। सत्र का संचालन एक्सिस बैंक के लीड प्रोडक्ट मैनेजर (कॉर्पोरेट सर्विसिंग) विजय चंदोला ने किया।

लेंडिंगकार्ट, एको इंश्योरेंस, बजाज फिनसर्व, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट और डीबीएस बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने एक जैसे एआई मॉडल और डेटा सेट पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिमों को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे ऐतिहासिक पूर्वाग्रह बढ़ सकते हैं और वित्तीय समावेशन प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दो-तीन वर्षों में एआई परिचालन लागत कम करने और राजस्व बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, वित्तीय संस्थानों के सामने वर्तमान में बड़ी चुनौती विशाल मात्रा में उपलब्ध असंरचित डेटा को उपयोगी एवं संरचित इंटेलिजेंस में बदलना है।

हाइब्रिड एआई मॉडल अपनाने पर जोर

विशेषज्ञों ने हाइब्रिड ऑपरेटिंग मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके तहत नियमित और दोहराव वाले कार्यों में एआई और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) का इस्तेमाल किया जाए, जबकि जोखिम संबंधी अंतिम निर्णय, अनुमोदन और धोखाधड़ी की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मानवीय निर्णय क्षमता को केंद्रीय भूमिका दी जाए।

विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

आईआईएम काशीपुर के एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (स्ट्रैटेजी) डॉ. गुरवीर सिंह जसवाल ने कहा कि एआई बुनियादी प्रबंधन सिद्धांतों का स्थान नहीं ले सकता। उन्होंने एआई के उत्तरों को चुनौती देने और उसका सही उपयोग सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

एक्सिस बैंक के क्षेत्रीय प्रमुख (ट्रेजरी) अनुज सहाय ने कहा कि संवेदनशील और अनुपालन आधारित व्यवसायों में एआई ने आठ घंटे के विश्लेषण कार्य को 15 मिनट में पूरा करने की क्षमता दिखाई है, लेकिन निर्णय लेने से पहले अपनी विश्लेषणात्मक क्षमता का इस्तेमाल करना और एआई के निष्कर्षों पर सवाल करना जरूरी है।

आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के सहायक उपाध्यक्ष (एचआर) नवीन आर. गंगारमानी ने कहा कि एआई स्वयं किसी व्यक्ति का स्थान नहीं ले सकता, लेकिन एआई को अपनाने और सीखने के लिए तैयार नहीं रहने वाला व्यक्ति प्रतिस्थापन के जोखिम का सामना कर सकता है।

बजाज फिनसर्व के उपाध्यक्ष (कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी) निखिल जैन ने कहा कि जोखिम क्षेत्र में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार हमेशा मनुष्य के पास रहेगा। एआई लागत कम करने और राजस्व बढ़ाने में मदद करेगा, लेकिन असंरचित डेटा को उपयोगी जानकारी में बदलना बड़ी चुनौती है।

कार्यक्रम के समापन पर छात्रों और शोधार्थियों के लिए संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इसमें उन्हें उद्योग जगत के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे संवाद करने और बीएफएसआई क्षेत्र की उभरती चुनौतियों एवं अवसरों को समझने का अवसर मिला।

कॉन्क्लेव में एक्सिस बैंक, आनंद राठी वेल्थ, क्रेडिट सेज़न, एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस, आरबीएल बैंक, लेंडिंगकार्ट, एको इंश्योरेंस, बजाज फिनसर्व, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट और डीबीएस बैंक के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही। आयोजन ने शैक्षणिक संस्थान और उद्योग जगत के बीच आईआईएम काशीपुर के मजबूत संबंधों तथा प्रभावी सेतु के रूप में संस्थान की भूमिका को रेखांकित किया।

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