उत्तराखण्ड
सीएसआईआर के 85वें स्थापना दिवस पर सीएसआईआर-सीबीआरआई में ओपन डे, विद्यार्थियों ने देखीं अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाएं

सीएसआईआर के स्थापना दिवस समारोह के दौरान देश की वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति में परिषद के आठ दशकों से अधिक के योगदान, अनुसंधान क्षमताओं, तकनीकी नवाचारों और उद्योगोन्मुखी समाधानों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में सीएसआईआर–इंडस्ट्री कनेक्ट एग्जिबिशन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, नई तकनीकों एवं प्रकाशनों का विमोचन तथा सीएसआईआर साइ-आर्ट गैलरी प्रमुख आकर्षण रहे। इस अवसर पर CSIR@85 विशेष प्रकाशन भी जारी किए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में सीएसआईआर की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने सीएसआईआर की 85 वर्षों की वैज्ञानिक यात्रा और देश की वैज्ञानिक-तकनीकी प्रगति में योगदान को प्रदर्शित करने वाले स्मारक डाक टिकट का भी अनावरण किया।
इसी क्रम में सीएसआईआर-सीबीआरआई में आयोजित ओपन डे में मेथोडिस्ट गर्ल्स डिग्री कॉलेज की 112 छात्राओं एवं तीन संकाय सदस्यों ने संस्थान का भ्रमण किया। प्रतिभागियों को संस्थान की प्रमुख अनुसंधान गतिविधियों, तकनीकी क्षेत्रों तथा भवन विज्ञान एवं निर्माण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सीबीआरआई की भूमिका की जानकारी दी गई।
सीएसआईआर-सीबीआरआई के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार ने विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति जिज्ञासा विकसित करने तथा अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नीरज जैन, वैज्ञानिक ‘एफ’ एवं प्रमुख, आउटरीच एंड डिसेमिनेशन सर्विसेज ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सीबीआरआई की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान गतिविधियों तथा भवन विज्ञान और निर्माण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों से अवगत कराया।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने डॉ. बिलिग प्रदर्शनी दीर्घा का अवलोकन किया, जहां भवन निर्माण एवं वास्तुकला से संबंधित विभिन्न मॉडल और तकनीकें प्रदर्शित की गई थीं। डॉ. हेमलता, वैज्ञानिक ‘डी’ ने राम मंदिर मॉडल की वास्तुकला, निर्माण संबंधी विशेषताओं और संरचनात्मक दृष्टिकोण के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी।
इसके बाद डॉ. चंदन स्वरूप मीणा, वैज्ञानिक ‘ई’ ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और संस्थान में संचालित विभिन्न अनुसंधान एवं तकनीकी परियोजनाओं की जानकारी साझा की। विद्यार्थियों ने अनुसंधान, आधुनिक निर्माण तकनीकों और भवन क्षेत्र में वैज्ञानिक नवाचार से जुड़े सवाल पूछे तथा वैज्ञानिकों से उनके उत्तर प्राप्त किए।
ओपन डे के दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान की विभिन्न महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं परीक्षण सुविधाओं का भी प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इनमें NEETF, 3D सुविधा, फायर सेफ्टी इंजीनियरिंग, रूरल पार्क तथा सोलर थर्मल टेस्टिंग फैसिलिटी लैब शामिल रहीं।
इन सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को सतत एवं किफायती आवास, आपदा-रोधी एवं सुरक्षित निर्माण, अग्नि सुरक्षा, उन्नत निर्माण सामग्री, ऊर्जा दक्षता तथा आधुनिक निर्माण तकनीकों के बारे में जानकारी मिली। 3D सुविधा में उन्हें निर्माण क्षेत्र में डिजिटल एवं स्वचालित तकनीकों की संभावनाओं से परिचित कराया गया, जबकि फायर सेफ्टी इंजीनियरिंग सुविधाओं के माध्यम से सुरक्षित भवन निर्माण और जोखिम न्यूनीकरण की उपयोगिता समझाई गई।
रूरल पार्क में विद्यार्थियों ने ग्रामीण एवं किफायती निर्माण तकनीकों तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित समाधानों को देखा। वहीं सोलर थर्मल टेस्टिंग फैसिलिटी के माध्यम से उन्हें ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा आधारित तकनीकों के परीक्षण एवं उपयोग की जानकारी मिली।
ओपन डे कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि वैज्ञानिक अनुसंधान किस प्रकार समाज की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, अनुसंधान के प्रति रुचि और नवाचार की भावना को बढ़ावा देने के साथ सुरक्षित, सतत, आपदा-रोधी, ऊर्जा-कुशल एवं किफायती निर्मित पर्यावरण के विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका को भी रेखांकित किया गया।

















