उत्तराखण्ड
सेना से लेकर जनहित तक: लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का सफर, राष्ट्रसेवा को बनाया जीवन का संकल्प

चार दशक तक भारतीय सेना में निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में सैनिकों, युवाओं और समाज के कल्याण से जुड़े विषयों पर दिया जोर
देहरादून। राष्ट्रसेवा का भाव जब जीवन का उद्देश्य बन जाता है, तो व्यक्ति की जिम्मेदारियां किसी एक पद या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहतीं। भारतीय सेना में लगभग चार दशक तक सेवाएं देने वाले लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह का जीवन सैन्य अनुशासन, नेतृत्व, राष्ट्र के प्रति समर्पण और सार्वजनिक दायित्वों की एक महत्वपूर्ण यात्रा के रूप में देखा जाता है। सेना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका ने उन्हें सैनिकों, युवाओं, शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों पर कार्य करने का अवसर दिया है
सेना में चार दशक की सेवा
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने भारतीय सेना में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं। वे सेना के उप प्रमुख सहित कई अहम दायित्वों पर रहे। सैन्य संचालन, मानव संसाधन प्रबंधन, प्रशिक्षण और भारत-चीन सीमा से जुड़े विषयों पर उनका अनुभव रहा है।
उनकी सैन्य सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल सहित कई सम्मान प्राप्त हुए। उनकी लगभग 40 वर्ष की सैन्य सेवा देश की सुरक्षा और सैन्य नेतृत्व के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को दर्शाती है।
राज्यपाल के रूप में जनहित के विषयों पर जोर
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक दायित्व संभाला। उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल सितंबर 2021 में शुरू हुआ। देवभूमि उत्तराखंड में सैनिकों, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों से जुड़े विषय उनके सार्वजनिक संवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान, उनके अनुभवों का समाज के विकास में उपयोग तथा युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करने जैसे विषयों पर उन्होंने जोर दिया है। राज्य में पूर्व सैनिकों के प्रतिनिधिमंडलों से संवाद के दौरान सैनिकों की सुविधाओं, शहीदों के सम्मान और युवाओं को सैन्य सेवाओं के लिए प्रोत्साहित करने से संबंधित मुद्दे भी उठाए गए हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन
किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा वर्ग होता है। युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। सैन्य अनुभव रखने वाले नेतृत्व की भूमिका इस दिशा में विशेष महत्व रखती है।
गुरमीत सिंह ने विभिन्न अवसरों पर युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने, लक्ष्य निर्धारित करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया है। उत्तराखंड जैसे सैन्य परंपरा वाले राज्य में युवाओं को सेना तथा अन्य सेवाओं में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का विषय भी महत्वपूर्ण है।
सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता
देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों के साथ-साथ उनके परिवार भी अनेक जिम्मेदारियां निभाते हैं। सैनिकों की समस्याओं, वीर नारियों की आवश्यकताओं और पूर्व सैनिकों के पुनर्वास जैसे विषयों पर संवेदनशील दृष्टिकोण आवश्यक है।
पूर्व सैनिकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ दिसंबर 2021 में हुई मुलाकात के दौरान सैनिकों से संबंधित सुविधाओं, सैन्य संस्थानों और शहीदों के सम्मान जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी। इस अवसर पर सैनिक परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए सहयोग का आश्वासन भी दिया गया था।
राष्ट्रसेवा से समाजसेवा तक का संदेश
सेना में सेवा व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने, अनुशासन बनाए रखने और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का अनुभव देती है। यही अनुभव सार्वजनिक जीवन और समाजसेवा में भी उपयोगी हो सकता है। पूर्व सैनिकों की क्षमताओं का उपयोग आपदा प्रबंधन, युवाओं के मार्गदर्शन, सामाजिक जागरूकता और जनकल्याण के कार्यों में किया जा सकता है।
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की यात्रा इस व्यापक विचार को सामने रखती है कि राष्ट्र के प्रति दायित्व केवल वर्दी पहनने तक सीमित नहीं होता। देश की सुरक्षा में योगदान देने के बाद भी समाज और जनता के प्रति जिम्मेदारी विभिन्न रूपों में जारी रह सकती है।
सेवा, अनुशासन और समर्पण की विरासत
किसी व्यक्ति के सार्वजनिक जीवन का मूल्यांकन उसके पद के साथ-साथ उसके कार्यों, संवाद और जनहित से जुड़े विषयों पर उसके योगदान के आधार पर भी किया जाता है। सेना से लेकर संवैधानिक पद तक की यात्रा यह संदेश देती है कि अनुभव का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग व्यापक समाज के हित में किया जाए।
उत्तराखंड की सैन्य परंपरा, युवाओं की आकांक्षाओं और पूर्व सैनिकों के सम्मान के संदर्भ में लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का अनुभव महत्वपूर्ण है। राष्ट्रसेवा, अनुशासन और जनहित के प्रति जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को आगे बढ़ाना ही ऐसी यात्रा की सबसे बड़ी सीख है





