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उत्तराखण्ड

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. जोगा सिंह की पत्नी नारायणी देवी का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

84 वर्ष की आयु में हीरानगर स्थित आवास पर ली अंतिम सांस, चित्रशिला घाट पर सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

हल्द्वानी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय जोगा सिंह की पत्नी एवं पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच, हीरानगर के सचिव देवेंद्र सिंह तोलिया की माता श्रीमती नारायणी देवी का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने सोमवार सुबह हीरानगर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन का समाचार मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने उनके आवास पर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।

श्रीमती नारायणी देवी अपने पीछे पुत्र देवेंद्र सिंह तोलिया, पुत्रियों प्रेमा बिष्ट, कमला तोलिया, चंपा बिष्ट एवं कुमारी मुन्नी देवी सहित पोते रोहन तोलिया और पोती गरिमा तोलिया को छोड़ गई हैं। उनके निधन पर एसडीएम मोनिका और तहसीलदार कुलदीप पांडे ने पुष्पचक्र अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। वहीं पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के संरक्षक एवं राज्य मंत्री हुकुम सिंह कुंवर, राज्यसभा सांसद दिनेश आर्य समेत सैकड़ों लोगों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान रहा स्व. जोगा सिंह का

नारायणी देवी के पति स्वर्गीय जोगा सिंह ने देश की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बचपन से ही देश को स्वतंत्र देखने का सपना संजोने वाले जोगा सिंह के मन में देशभक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी थी। उन्होंने नाबालिग अवस्था में ही स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेना शुरू कर दिया था, जिसके चलते अंग्रेज अधिकारी उनकी तलाश में जुट गए थे।

वर्ष 1942 में जोगा सिंह कप्तान दलीप सिंह के साथ फरार हो गए थे। वर्ष 1944 में अंग्रेज सैनिकों ने उन्हें पीपलपड़ाव के जंगल से गिरफ्तार कर लिया और हवालात में बंद कर दिया। नाबालिग होने के बावजूद उन्हें महिला जेल में रखा गया। उन्हें एक वर्ष की कठोर कैद और 100 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके बाद उन्हें सेंट्रल जेल भेजा गया, जहां वे पंडित नारायण दत्त तिवारी के साथ रहे। बाद में उन्हें लुधियाना जेल स्थानांतरित कर दिया गया। जेल से रिहा होने के बाद भी उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेना जारी रखा। वर्ष 1993 में उनका निधन हो गया था।

चित्रशिला घाट पर दी गई अंतिम विदाई

श्रीमती नारायणी देवी की अंतिम यात्रा सोमवार दोपहर ढाई बजे हीरानगर स्थित उनके आवास से रानीबाग के चित्रशिला घाट के लिए रवाना हुई। यहां सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके पुत्र देवेंद्र सिंह तोलिया ने मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने नम आंखों से दिवंगत नारायणी देवी को विदाई दी।

इस दौरान पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे। क्षेत्रवासियों ने नारायणी देवी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

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