उत्तराखण्ड
सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य ने किया सुशीला तिवारी अस्पताल का निरीक्षण





हल्द्वानी, 24 अगस्त। चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सचिव विनयशंकर पांडे ने सोमवार को डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय का विस्तृत निरीक्षण कर चिकित्सा सुविधाओं, मरीजों को उपलब्ध कराए जा रहे उपचार और अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने विभिन्न विभागों की ओपीडी, वार्ड, आईसीयू और एसएनसीयू का निरीक्षण करने के साथ मरीजों एवं उनके परिजनों से बातचीत कर अस्पताल में मिल रही सुविधाओं का फीडबैक भी लिया।
निरीक्षण के दौरान सचिव ने सर्जरी, यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, नेत्र रोग, अर्जुन नेत्र कोष एवं बाल रोग विभाग की ओपीडी का निरीक्षण किया। उन्होंने ओपीडी में मरीजों की संख्या, पंजीकरण तथा रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियों की जानकारी ली। चिकित्सकों एवं कर्मचारियों से उपचार व्यवस्था की जानकारी लेते हुए उन्होंने मरीजों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
विभिन्न वार्डों के निरीक्षण के दौरान सचिव ने भर्ती मरीजों से उनके स्वास्थ्य एवं उपचार की जानकारी ली। उन्होंने मरीजों और तीमारदारों से दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकीय सेवाओं तथा अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में फीडबैक लिया। साथ ही चिकित्सकों से मरीजों की बीमारी, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और उपचार की प्रगति की जानकारी प्राप्त की।
सचिव ने आईसीयू एवं एसएनसीयू का निरीक्षण करते हुए गंभीर मरीजों के उपचार एवं देखभाल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों एवं चिकित्सकों को निर्देश दिए कि गंभीर मरीजों को उपचार के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध कराई जाएं।
हृदय रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के प्रयास
चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सचिव विनयशंकर पांडे ने कहा कि डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, जहां दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि शीघ्र ही हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी दूर होगी और मरीजों को हृदय संबंधी रोगों के उपचार की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
उन्होंने बताया कि चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए शासन स्तर पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सुपर स्पेशलिटी चिकित्सकों के लिए पांच लाख रुपये तक का वेतन निर्धारित किया गया है, ताकि विशेषज्ञ चिकित्सकों को प्रदेश में सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से स्पेशलिटी एवं सुपर स्पेशलिटी चिकित्सकों की कमी दूर करने में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
सचिव ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने से गंभीर एवं जटिल बीमारियों के उपचार के लिए मरीजों को अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने क्षेत्र में ही बेहतर उपचार मिल सकेगा।
ऑनलाइन पंजीकरण और डिजिटल भुगतान पर जोर
निरीक्षण के दौरान सचिव ने राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी के प्राचार्य प्रो. डॉ. अजय आर्या से मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने ऑनलाइन पंजीकरण, चिकित्सकीय परामर्श तथा क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने मरीजों की सुविधा, चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता, मानव संसाधन, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर प्राचार्य को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान प्रो. डॉ. अजय आर्या, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, डॉ. शहजाद अहमद, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. रश्मि पंत, मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल, डॉ. परमजीत सिंह, डॉ. वैभव कुमार, जी.बी. मौल, टी. मैथ्यू, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट, ईला चौधरी, डिप्टी नर्सिंग सुपरिटेंडेंट सहित चिकित्सक एवं अस्पताल के अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
आलोक उप्रेती ,जनसंपर्क अधिकारी ,राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी

















