Connect with us

उत्तराखण्ड

विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में युवाओं की प्रतिभा और AI की होगी निर्णायक भूमिका

लोक भवन में ‘उत्तराखण्ड डीप-टेक 2030’ कार्यक्रम का शुभारंभ, पहाड़ की चुनौतियों के तकनीकी समाधान पर जोर

देहरादून। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में आज के युवाओं की प्रतिभा, दूरदर्शी सोच और नवाचार निर्णायक भूमिका निभाएंगे। आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग देश और समाज की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाना समय की आवश्यकता है। यह विचार लोक भवन में आयोजित ‘उत्तराखण्ड डीप-टेक 2030: पहाड़ के लिए तकनीक का निर्माण’ कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए गए।कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय चुनौतियों के समाधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैज्ञानिक शोध और तकनीकी नवाचार की भूमिका पर जोर दिया गया। इस दौरान विश्वास व्यक्त किया गया कि आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग से पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के साथ विकास की नई संभावनाएं भी सृजित की जा सकती हैं।

शिक्षा से लेकर आपदा प्रबंधन तक तकनीक से बदलेगी तस्वीर

कार्यक्रम में कहा गया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीक का प्रभावी उपयोग उत्तराखण्ड के विकास को नई गति दे सकता है। AI आधारित समाधान दूरस्थ गांवों तक आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने और स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान खोजने में सहायक साबित हो सकते हैं।

इसके साथ ही शोध और नवाचार को प्रोत्साहन मिलने से युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित होंगे। तकनीकी क्षेत्र में स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने से उत्तराखण्ड के युवा अपने ही प्रदेश में रहकर नए विचारों को व्यावहारिक रूप दे सकेंगे।

ज्ञान-विज्ञान और नवाचार की अग्रणी भूमि बनेगा उत्तराखण्ड कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखण्ड को देवभूमि और वीरभूमि की पहचान के साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है। इसके लिए युवाओं, शोधकर्ताओं और नवाचार से जुड़े लोगों को पहाड़ की वास्तविक समस्याओं को समझकर उनके व्यावहारिक एवं प्रभावी समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया

युवाओं का आह्वान किया गया कि वे अपनी प्रतिभा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी कौशल का उपयोग पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों को अवसरों में बदलने के लिए करें। तकनीक का इस्तेमाल केवल आधुनिकता के प्रदर्शन तक सीमित न रहे, बल्कि उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

इस बात पर भी जोर दिया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक का विकास मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। तकनीक तभी सार्थक होगी, जब वह जनजीवन को सशक्त बनाए और समाज के समग्र विकास में योगदान दे।

उत्तराखण्ड डीप-टेक 2030’ की यह पहल प्रदेश में नवाचार और तकनीकी विकास की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के साथ विकसित उत्तराखण्ड के माध्यम से विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प को मजबूती प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

More in उत्तराखण्ड

Trending News

Follow Facebook Page