उत्तराखण्ड
यूजीसी के नए नियमों, जातिगत आरक्षण और एससी/एसटी एक्ट को समाप्त करने की मांग पर 22 अक्टूबर को जनसंवाद

हल्द्वानी के हीरानगर स्थित लगन गार्डन में दोपहर 3:30 बजे होगी बैठक, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के विचार आमंत्रित
हल्द्वानी, 21 अक्टूबर। यूजीसी के नए नियमों, शिक्षा एवं सरकारी सेवाओं में जातिगत आरक्षण और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को समाप्त करने की मांग को लेकर गुरुवार, 22 अक्टूबर को हल्द्वानी में जनसंवाद बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक दोपहर 3:30 बजे हीरानगर स्थित लगन गार्डन में होगी। आयोजकों के अनुसार, इसमें शिक्षा, रोजगार और कानूनी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जाएगी।
आयोजक प्रकाश हर्बोला ने बताया कि बैठक में यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने, जातिगत आरक्षण समाप्त करने तथा एससी/एसटी एक्ट को समाप्त करने की मांग पर विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने, आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से वंचित लोगों को सहायता देने और नीति निर्माण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।
बैठक में उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण, संस्थागत जवाबदेही तथा सभी पक्षों को सुनने वाली प्रक्रिया सुनिश्चित करने के सुझाव भी रखे जाएंगे। इसके अलावा शिक्षा, सरकारी नौकरियों और पदोन्नति में जाति आधारित आरक्षण के स्थान पर आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से वंचित लोगों को सहायता देने, छात्रवृत्ति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, एससी/एसटी एक्ट को लेकर भी बैठक में चर्चा होगी। इस दौरान वास्तविक पीड़ितों की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच, निर्दोष व्यक्तियों के अधिकार और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर विचार रखे जाएंगे।
लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने कहा कि कानूनी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें वास्तविक पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय मिले तथा किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। उन्होंने सामाजिक सद्भाव बनाए रखते हुए सभी वर्गों के लोगों की बात सुनने और संबंधित कानूनों में बदलाव अथवा उन्हें समाप्त करने की मांग पर संवैधानिक दायरे में चर्चा करने की आवश्यकता बताई।
बैठक में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, प्रबुद्ध नागरिकों, विद्यार्थियों और युवाओं को अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया गया है। चर्चा के दौरान प्राप्त सुझावों को संकलित कर सक्षम सरकारी स्तर तक ज्ञापन अथवा अन्य शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक माध्यमों से पहुंचाने पर भी विचार किया जाएगा।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि बैठक का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि संबंधित नीतियों और कानूनों पर शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक दायरे में विचार-विमर्श करना है। उन्होंने इच्छुक नागरिकों से बैठक में शामिल होकर जिम्मेदार संवाद में भाग लेने का अनुरोध किया है।





