उत्तराखण्ड
मेरे सपनों का देहरादून’ में झलकी बच्चों की कल्पनाएं, बाल लेखन कार्यशाला के चौथे दिन तैयार हुए निबंध, कहानियां और कविताएं



नुक्कड़ नाटक ‘मोबाइल टन टनाटन टन’ के लिए बच्चों ने खुद लिखे संवाद, दीवार पत्रिका ‘बाल दर्पण’ का हुआ लोकार्पण
बालप्रहरी, भारत ज्ञान विज्ञान समिति और देहरादून किताब कौतिक आयोजन समिति की पहल; अजीम प्रेम जी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित हो रही पांच दिवसीय कार्यशाला
देहरादून, 17 अक्टूबर। बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने, उनकी कल्पनाशक्ति को अभिव्यक्ति देने और लेखन के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से दून लाइब्रेरी, देहरादून में आयोजित पांच दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला के चौथे दिन बच्चों ने विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। ‘मेरे सपनों का देहरादून’ विषय पर बच्चों ने रोचक निबंध लिखकर अपने शहर के प्रति अपनी अपेक्षाओं, कल्पनाओं और सपनों को शब्दों में पिरोया। वहीं, समसामयिक विषयों पर नुक्कड़ नाटक तैयार करने के साथ बच्चों ने अपनी हस्तलिखित पुस्तकों के लिए निबंध, कहानियां, कविताएं, चुटकुले और पहेलियां भी लिखीं। अल्मोड़ा से प्रकाशित बच्चों की पत्रिका बालप्रहरी, भारत ज्ञान विज्ञान समिति और देहरादून किताब कौतिक आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला को अजीम प्रेम जी फाउंडेशन का सहयोग प्राप्त हो रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों को पढ़ने-लिखने के साथ-साथ अपनी बात स्वतंत्र रूप से रखने, समूह में काम करने और अपनी रचनात्मक क्षमता को पहचानने के अवसर उपलब्ध कराना है। समूह गीत से हुई दिन की शुरुआत कार्यशाला के चौथे दिन की शुरुआत बच्चों ने समूह गीत ‘मैं तुमको विश्वास दूं’ से की। इसके बाद अलग-अलग समूहों में बच्चों ने लेखन, नाटक, कविता, कहानी और अन्य गतिविधियों में हिस्सा लिया। ‘मेरे सपनों का देहरादून’ विषय पर लिखे गए निबंधों में बच्चों ने अपने शहर को लेकर अपनी कल्पनाओं और अपेक्षाओं को सामने रखा। बच्चों की रचनाओं में शहर के प्रति उनका लगाव और उसे बेहतर बनाने की कल्पना दिखाई दी। इस गतिविधि ने बच्चों को अपने आसपास के परिवेश को समझने और अपने विचारों को लेखन के माध्यम से व्यक्त करने का अवसर दिया। यात्रा वृत्तांत लेखन की बारीकियां सीखीं बालप्रहरी के संपादक उदय किरौला ने बच्चों को यात्रा वृत्तांत लेखन के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बच्चों को यात्रा के दौरान देखे गए स्थानों, अनुभवों और घटनाओं को रोचक ढंग से लिखने के तौर-तरीकों से परिचित कराया। इसके बाद बच्चों ने अपने यात्रा अनुभवों को सुंदर लेखों के रूप में प्रस्तुत किया। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों ने सीखा कि किसी यात्रा का वर्णन केवल स्थानों की जानकारी देना नहीं, बल्कि अपने अनुभवों, भावनाओं और यादों को प्रभावशाली तरीके से पाठकों तक पहुंचाना भी है। दस मिनट में तैयार किए नाटक के संवाद कार्यशाला में नुक्कड़ नाटक के लिए चयनित बच्चों को उनकी कल्पनाशक्ति और त्वरित लेखन क्षमता को परखने का अवसर मिला। बच्चों को ‘मोबाइल टन टनाटन टन’ नामक नाटक के लिए महज दस मिनट में अपने संवाद स्वयं तैयार करने का कार्य दिया गया। बच्चों ने इस चुनौती को उत्साह के साथ स्वीकार किया और मिलकर संवाद तैयार किए। समसामयिक विषयों पर नुक्कड़ नाटक तैयार करने की इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों को सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक करना और नाटक के माध्यम से अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने के लिए प्रेरित करना था। खेल-खेल में सीखने का मिला अवसर कार्यशाला के दौरान बच्चों को ‘नेताजी की खोज’, ‘तोता कहता है’, ‘जैसा मैं कहूं’, ‘कितना बड़ा पहाड़’ और ‘पिज्जा हट’ जैसे खेल भी कराए गए। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को मनोरंजन के साथ रचनात्मक सोच, आपसी सहयोग, एकाग्रता और संवाद कौशल विकसित करने का अवसर मिला। बच्चों ने अलग-अलग समूहों में काम करते हुए विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। कार्यशाला में खेलों को सीखने की प्रक्रिया से जोड़कर बच्चों की भागीदारी को और रोचक बनाया गया। हस्तलिखित पुस्तकों के लिए तैयार कीं मौलिक रचनाएं कार्यशाला के दौरान बच्चों ने अपनी हस्तलिखित पुस्तकों के लिए निबंध, कहानियां, कविताएं, चुटकुले और पहेलियां तैयार कीं। इस गतिविधि ने बच्चों को लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाने और अपनी कल्पनाओं को लिखित रूप देने का अवसर प्रदान किया। आयोजकों का उद्देश्य बच्चों में लेखन के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उन्हें यह अनुभव कराना है कि उनके विचार और अनुभव भी पुस्तक का हिस्सा बन सकते हैं। अपनी रचनाओं को हस्तलिखित पुस्तक में शामिल करने की प्रक्रिया बच्चों के लिए उत्साहवर्धक रही। बाल दर्पण’ दीवार पत्रिका का लोकार्पण कार्यशाला के दौरान डॉ. शशिकला के संपादन में तैयार दीवार पत्रिका ‘बाल दर्पण’ का अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया। इस पत्रिका में बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को स्थान देने की पहल की गई है। दीवार पत्रिका बच्चों के लिए अपनी रचनाओं को साझा करने और दूसरे बच्चों की रचनाओं को पढ़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी। इससे बच्चों को अपनी लेखन प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ एक-दूसरे के विचारों से सीखने का अवसर भी मिला।।साहित्यकारों और संदर्भदाताओं ने किया मार्गदर्शन कार्यशाला में विभिन्न गतिविधियों के संचालन और बच्चों के मार्गदर्शन के लिए अनुभवी संदर्भदाताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नुक्कड़ नाटक में उदय किरौला और डॉ. चंद्रकला भंडारी ने बच्चों का मार्गदर्शन किया। बाल कवि सम्मेलन में प्रकाश चंद्र पाण्डेय और अदिति जखमोला ने सहयोग दिया। समूह गीत की गतिविधि में डॉ. शशिकला और सुमन सेमवाल ने बच्चों का मार्गदर्शन किया, जबकि दीवार पत्रिका के लिए कुसुम वर्तवाल और धर्मेन्द्र सिंघल ने संदर्भदाता के रूप में योगदान दिया। मुकेश नौटियाल और डॉ. सुरेन्द्र सेमल्टी ने बच्चों को कहानी लेखन की बारीकियों से परिचित कराया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को लेखन, साहित्य, मंचीय प्रस्तुति और सामूहिक रचनात्मकता के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला। लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ें बच्चे : प्रो. बीके जोशी इस अवसर पर दून लाइब्रेरी के प्रो. बीके जोशी ने बच्चों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित करना और उसकी प्राप्ति के लिए योजनाबद्ध रणनीति तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों की प्रतिभा को निखारने तथा उन्हें मौखिक और लिखित अभिव्यक्ति के अवसर उपलब्ध कराने में इस प्रकार की कार्यशालाएं मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। ऐसी गतिविधियां बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने, नए विचार विकसित करने और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने के लिए प्रेरित करती हैं। कार्यक्रम में एन. रविशंकर, श्याम सरन, विजय भट्ट, योगेंद्र नेगी, संदीप ढैला, डीके पांडेय और सुंदर सिंह बिष्ट सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
18 अक्टूबर को होगा समापन समारोह
पांच दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला का समापन समारोह 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे दून लाइब्रेरी, देहरादून में आयोजित किया जाएगा। बालप्रहरी और भारत ज्ञान विज्ञान समिति की ओर से जारी संयुक्त विज्ञप्ति में साहित्य प्रेमियों एवं शुभचिंतकों से समारोह में उपस्थित होने की अपील की गई है।
कार्यशाला के माध्यम से बच्चों को लेखन, साहित्य, कला और सामूहिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे अपनी रचनात्मक क्षमता को पहचानते हुए स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करना सीख सकें।





















