उत्तराखण्ड
भगत सिंह के विचारों को किया याद, भोजनमाताओं ने विधायक सुमित हृदयेश को सौंपा ज्ञापन


कम मानदेय, अतिरिक्त कार्य और रोजगार सुरक्षा सहित विभिन्न मांगों के समाधान की उठाई आवाज
हल्द्वानी। प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, उत्तराखण्ड के बैनर तले सोमवार को डिग्री कॉलेज के निकट डी.डी. पार्क में भोजनमाताएं एकत्र हुईं। इस दौरान शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्म दिवस के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई तथा उनके विचारों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के बाद संगठन की ओर से भोजनमाताओं की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर विधायक सुमित हृदयेश को ज्ञापन सौंपा गया। भोजनमाताओं ने कहा कि वे वर्षों से सरकारी विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और परोसने का महत्वपूर्ण दायित्व निभा रही हैं, लेकिन उन्हें मात्र लगभग तीन हजार रुपये के मानदेय में कार्य करना पड़ रहा है। महंगाई के मौजूदा दौर में इतनी कम राशि में परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल है।
संगठन ने आरोप लगाया कि भोजन बनाने के अलावा कई विद्यालयों में उनसे सफाईकर्मी, माली और चौकीदार तक के कार्य लिए जा रहे हैं। विद्यालय परिसर की सफाई, झाड़ियों की कटाई, पानी की व्यवस्था तथा विद्यालय बंद करवाने जैसे अतिरिक्त कार्य भी भोजनमाताओं से कराए जाते हैं। उनका कहना है कि इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों के लिए उन्हें अलग से कोई पारिश्रमिक नहीं दिया जाता।
भोजनमाताओं ने बताया कि कई विद्यालयों में चार भोजनमाताओं में से एक को अन्य विद्यालयी कार्यों में लगा दिया जाता है, जिसके चलते उसके हिस्से का काम भी अन्य भोजनमाताओं पर आ जाता है। इसके अलावा चुनाव ड्यूटी में भी उनकी सेवाएं ली जाती हैं, लेकिन अतिरिक्त कार्य के लिए अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता। संगठन ने नियमित और पर्याप्त अवकाश की स्पष्ट व्यवस्था किए जाने की भी मांग उठाई।
संगठन के अनुसार, अनेक भोजनमाताएं 10 से 20 वर्ष या उससे अधिक समय से विद्यालयों में सेवाएं दे रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके रोजगार की कोई स्थायी सुरक्षा नहीं है। विद्यालय बंद होने अथवा उनके विलय की स्थिति में भोजनमाताओं के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो जाता है।
संगठन ने मांग की कि भोजनमाताओं को सम्मानजनक पारिश्रमिक दिया जाए, अतिरिक्त कार्य का अलग भुगतान सुनिश्चित किया जाए, अवकाश की स्पष्ट व्यवस्था लागू की जाए तथा वर्षों से कार्यरत भोजनमाताओं को रोजगार सुरक्षा प्रदान की जाए। साथ ही विद्यालय बंद या विलय होने की स्थिति में उन्हें नजदीकी विद्यालयों में समायोजित करने की व्यवस्था की जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान विधायक सुमित हृदयेश ने भोजनमाताओं को आश्वस्त किया कि उनके मुद्दों को मांग पत्र में शामिल करते हुए विधानसभा में उनकी समस्याओं को उठाने का प्रयास किया जाएगा।
इस अवसर पर संगठन की महामंत्री रजनी, प्रचार मंत्री चंपा गिनवाल, ब्लॉक अध्यक्ष पुष्पा कुड़ई, भावना, हेमा भट्ट सहित बड़ी संख्या में भोजनमाताएं मौजूद रहीं। संगठन ने कहा कि भोजनमाताएं विद्यालयों में बच्चों के पोषण और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य में योगदान दे रही हैं, इसलिए उनके श्रम और सेवाओं को उचित सम्मान एवं आर्थिक सुरक्षा मिलना आवश्यक है।
— प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, उत्तराखण्ड

















