उत्तराखण्ड
बच्चों की हस्तलिखित पुस्तकों की देहरादून किताब कौतिक में लगेगी प्रदर्शनी


पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने बच्चों को दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
देहरादून, 18 अक्टूबर। दून लाइब्रेरी में आयोजित पांच दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला का रविवार को समापन हो गया। बाल पत्रिका ‘बालप्रहरी’, भारत ज्ञान विज्ञान समिति और देहरादून किताब कौतिक आयोजन समिति की ओर से अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों के 45 बच्चों ने प्रतिभाग किया। बच्चों ने 15-15 पृष्ठों की हस्तलिखित पुस्तकें तैयार कीं, जो आकर्षण का केंद्र रहीं।
कार्यशाला के अंतिम दिन बाल कवि सम्मेलन में बच्चों ने बादल, पर्यावरण और मोबाइल के दुष्प्रभावों पर स्वरचित कविताएं प्रस्तुत कीं। उदय किरौला के निर्देशन में नुक्कड़ नाटक ‘मोबाइल टन टना टन टन’ के माध्यम से मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान प्रकाशचंद्र पांडेय द्वारा संपादित दीवार पत्रिका ‘बाल अभिव्यक्ति’ का लोकार्पण भी किया गया।
मुख्य अतिथि पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने बच्चों को पेड़ों और पर्यावरण के महत्व की जानकारी देते हुए मैती आंदोलन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के साथ ही संवेदनशील इंसान बनाना भी जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रांतीय अध्यक्ष विजय भट्ट ने बच्चों में मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को विकसित करने पर जोर दिया।
आयोजक दयाल पांडेय ने बताया कि 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले देहरादून किताब कौतिक में बच्चों की हस्तलिखित पुस्तकों की विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। कार्यक्रम में प्रवीण भट्ट, कमलेश खंतवाल, मनोज पांडे, अदिति जमलोकी और डॉ. शशिकला सहित कई लोग मौजूद रहे।





















