उत्तराखण्ड
दून लाइब्रेरी में बाल लेखन कार्यशाला: खेल-खेल में सीखे विज्ञान के प्रयोग, नृत्य के साथ पहाड़े और कविता लेखन




देहरादून, 15 अक्टूबर। दून लाइब्रेरी में आयोजित पांच दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला के दूसरे दिन बच्चों ने रचनात्मक गतिविधियों, खेलों, विज्ञान के सरल प्रयोगों और साहित्यिक अभ्यास के माध्यम से ज्ञान अर्जित किया। दिन की शुरुआत ‘ज्ञान का दिया जलाने’ समूह गीत से हुई। अल्मोड़ा से प्रकाशित बाल पत्रिका ‘बालप्रहरी’, भारत ज्ञान विज्ञान समिति और किताब कौतिक आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस शिविर में बच्चों को लेखन की विभिन्न विधाओं से परिचित कराया जा रहा है। कार्यशाला के दौरान शब्द लेखन, पहाड़ा लेखन, चित्रकला और खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आलिया नूर, अंशिका रावत, तनू चंद, खुशी कुमारी, सरोज कुमार, अभिजीत, अदिति और कनिका को बालसाहित्य पुरस्कार प्रदान किए गए। बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए ‘नेताजी की खोज’, ‘तोता कहता है’, ‘जैसा मैं कहूं’, ‘कितने भाई कितने’, ‘कितना बड़ा पहाड़’ और ‘पिज्जा हट’ जैसे रोचक खेल भी कराए गए। बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना जरूरी अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के अंबरीश बिष्ट ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक युग में भी समाज में अनेक अंधविश्वास और कुरीतियां मौजूद हैं। इन्हें दूर करने के लिए बचपन से ही बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना आवश्यक है। भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रांतीय अध्यक्ष विजय भट्ट ने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे हम अपने दैनिक जीवन और घरों में भी देख सकते हैं। उन्होंने खेल-खेल में विज्ञान के कई सरल प्रयोग समझाकर बच्चों की जिज्ञासा बढ़ाई। निबंध लेखन की बारीकियां सीखीं बालप्रहरी के संपादक उदय किरौला ने बच्चों को निबंध लेखन की बारीकियों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि निबंध साहित्य की एक स्वतंत्र विधा है, जिसमें विचारों को अपने ढंग से अभिव्यक्त करने की पर्याप्त स्वतंत्रता होती है। ‘पेन’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने उसकी पृष्ठभूमि, प्रकार, विभिन्न भागों, लाभ-हानि और उपसंहार के आधार पर निबंध तैयार करने की प्रक्रिया समझाई। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, राजपुर रोड की शिक्षिका कुसुम वर्तवाल के मार्गदर्शन में बच्चों ने ‘बच्चे’, ‘फूल’, ‘बादल’, ‘हमारा श्रीनगर’, ‘भोजन की बर्बादी’, ‘बेटी बचाओ’, ‘कूड़ादान’ और ‘बेटियां नहीं हैं कम’ जैसे विषयों पर सुंदर कविताएं लिखीं।
अपनी हस्तलिखित पुस्तक तैयार कर रहे बच्चे कार्यशाला में बच्चे अपनी हस्तलिखित पुस्तक के लिए ‘मेरा परिचय’, ‘मेरा स्कूल’, ‘मेरी दिनचर्या’ और ‘एक दिन की बात है’ जैसे विषयों पर लेखन कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने चुटकुले और अन्य रचनाएं भी तैयार कीं। इस रचनात्मक शिविर में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, राजपुर रोड, सनातन धर्म इंटर कॉलेज, राजकीय जूनियर हाईस्कूल परेड ग्राउंड और सीएनआई गर्ल्स इंटर कॉलेज के लगभग 50 छात्र-छात्राएं उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर रहे हैं।
इस अवसर पर अंबरीश बिष्ट, हेम पंत, विजय भट्ट, अदिति जमलोकी, सुमन सेमवाल, कुसुम वर्तवाल और अनीता अंथवाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में लेखन, रचनात्मकता, वैज्ञानिक सोच और साहित्य के प्रति रुचि विकसित करना है।





















