उत्तराखण्ड
दुर्गम हिमालय में भारतीय सेना के ईवी राइडर्स का साहसिक अभियान, माणा में वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि


हल्द्वानी, 17 अक्टूबर। भारतीय सेना ने तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अपने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) राइडिंग अभियान स्टैलियंस पैन-हिमालयन ईवी राइडिंग एक्सपीडिशन (SPHERE) के तहत गढ़वाल हिमालय के दुर्गम पर्वतीय मार्गों को पार कर देश के प्रथम गांव माणा तक पहुंचने की उपलब्धि हासिल की। अभियान दल ने माणा स्थित युद्ध स्मारक पर देश की रक्षा में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।इस अभियान का नेतृत्व मेजर जनरल विशाल चौहान ने किया। उनके साथ कर्नल अरविंदर सिंह चहल, लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र सिंह, एसएम, मेजर शिवम सिंह सहित आर्मी सर्विस कोर (एएससी) के अधिकारी एवं जवान शामिल रहे। अभियान दल ने दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों के माध्यम से यात्रा कर सैन्य परिवहन में हरित तकनीक की संभावनाओं को प्रदर्शित किया।
पंच प्रयागों से होकर गुजरा अभियान
उत्तराखंड की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच अभियान दल ने राज्य के पवित्र पंच प्रयागों से होकर यात्रा पूरी की। इस दौरान टीम को दुर्गम पहाड़ी रास्तों, ऊंचाई वाले क्षेत्रों और कठिन पर्वतीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इन चुनौतियों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन कर अभियान ने यह प्रदर्शित किया कि भविष्य में सैन्य परिवहन व्यवस्था को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में ईवी तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अभियान का गढ़वाल-शिवालिक चरण 17 अक्टूबर को कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी स्थित मिलिट्री स्टेशन में संपन्न हुआ। माणा में वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने से लेकर दुर्गम पर्वतीय मार्गों पर इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन तक, इस अभियान ने सैन्य परंपराओं, साहस और तकनीकी प्रगति का संदेश दिया।
एएससी के 266वें स्थापना दिवस पर विशेष पहलयह अभियान आर्मी सर्विस कोर (एएससी) के 266वें स्थापना दिवस और 12वें एएससी रीयूनियन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इसका प्रमुख उद्देश्य सैन्य परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों की उपयोगिता और उनकी परिचालन क्षमता को प्रदर्शित करना है। साथ ही, पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और सैन्य रसद व्यवस्था को अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने की संभावनाओं को सामने लाना भी अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
आत्मनिर्भरता और हरित भविष्य की ओर भारतीय सेना
दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन की यह पहल भारतीय सेना की तकनीकी क्षमता, नवाचार और बदलती परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को विकसित करने के प्रयासों को रेखांकित करती है। पर्वतीय क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों के बीच इस प्रकार का अभियान भविष्य में सैन्य परिवहन के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की उपयोगिता को समझने में भी सहायक हो सकता है।
यह अभियान केवल एक साहसिक यात्रा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देशभक्ति, शहीदों के प्रति सम्मान, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। तकनीकी नवाचार के साथ आगे बढ़ते हुए भारतीय सेना ने यह संकेत दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारियों के निर्वहन के साथ-साथ टिकाऊ और हरित भविष्य की दिशा में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।





















