उत्तराखण्ड
दिल्ली से उत्तराखंड तक टैक्स व्यवस्था पर सवाल, ट्रकों के साथ चल रही कारों की भूमिका पर उठे सवाल

हल्द्वानी। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी ने राज्य की टैक्स व्यवस्था और दिल्ली से उत्तराखंड आने वाले मालवाहक वाहनों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि टैक्स विभाग की ओर से भले ही सख्ती और निगरानी के दावे किए जा रहे हों, लेकिन दिल्ली से उत्तराखंड आने वाले कुछ ट्रकों के संचालन को लेकर अलग तरह की गतिविधियां चलने की चर्चा है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ मालवाहक ट्रकों के आगे-आगे अथवा पीछे-पीछे निजी कारों के चलने और रास्ते में उनके माध्यम से कथित समन्वय किए जाने की बात सामने आ रही है। इसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन वाहनों की आवाजाही महज संयोग है या इसके पीछे किसी प्रकार की पूर्व निर्धारित व्यवस्था काम कर रही है।
बताया जा रहा है कि दिल्ली से उत्तराखंड की सीमा तक आने वाले मालवाहक वाहनों की जांच, बिलों की सत्यता, ई-वे बिल, माल की मात्रा और टैक्स संबंधी दस्तावेजों की नियमित जांच की व्यवस्था है। इसके बावजूद यदि किसी स्तर पर मिलीभगत या अनियमितता की शिकायतें सामने आ रही हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कथित तौर पर ‘सेटिंग-गेटिंग’ के जरिए वाहनों को आसानी से निकालने की चर्चा विभागीय स्तर पर भी हो रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह व्यवस्था वास्तव में कहीं संचालित हो रही है तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंच रही है।
मामले को लेकर मांग उठ रही है कि दिल्ली से उत्तराखंड आने वाले संदिग्ध मालवाहक वाहनों की सीसीटीवी फुटेज, ई-वे बिल, जीएसटी दस्तावेज, टोल रिकॉर्ड और संबंधित वाहनों की आवाजाही का मिलान कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि ट्रकों के साथ चलने वाली कारों की भूमिका क्या है और कहीं टैक्स चोरी अथवा विभागीय स्तर पर अनियमितता तो नहीं हो रही।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इन गंभीर आरोपों का संज्ञान लेकर मामले की जांच कराता है या नहीं। यदि आरोप निराधार हैं तो विभाग के पास तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करने का अवसर भी है, जबकि यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

















