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उत्तराखण्ड

डॉक्टरों और अस्पतालों के विज्ञापनों पर NMC की सख्ती, भ्रामक दावों और फर्जी रिव्यू पर प्रतिबंध

नई दिल्ली,,सोशल मीडिया पर प्रचार, मरीजों की गवाही और AI से तैयार भ्रामक विज्ञापनों पर कड़ी नजर; चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता और मरीजों के हितों को प्राथमिकता

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के चिकित्सा विज्ञापन और जनसंचार संबंधी दिशा-निर्देशों को लेकर चिकित्सा क्षेत्र में नैतिक प्रचार और मरीजों के अधिकारों का मुद्दा चर्चा में है। 6 अक्टूबर 2026 को जारी किए गए बताए जा रहे नए दिशा-निर्देशों में डॉक्टरों और अस्पतालों के विज्ञापनों, सोशल मीडिया प्रचार, ऑनलाइन रेटिंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार प्रचार सामग्री से जुड़े प्रावधानों पर जोर दिया गया है।

इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य मरीजों को भ्रामक दावों से बचाना और चिकित्सा सेवाओं में पारदर्शिता तथा विश्वास को बढ़ावा देना बताया गया है। हालांकि, इनकी अंतिम और सटीक स्थिति की पुष्टि के लिए NMC की आधिकारिक अधिसूचना का सत्यापन आवश्यक है।

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, डॉक्टरों और अस्पतालों द्वारा स्वयं को ‘सबसे अच्छा डॉक्टर’, ‘नंबर वन विशेषज्ञ’ या उपचार में ‘100 प्रतिशत सफलता’ देने वाला बताने जैसे अप्रमाणित दावों पर रोक लगाने पर जोर है। इसी तरह, चमत्कारी इलाज, निश्चित उपचार की गारंटी और परिणामों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने वाले प्रचार को भी चिकित्सा नैतिकता के विरुद्ध माना गया है।

मरीजों की तस्वीरों और ऑनलाइन समीक्षाओं पर भी नजर

चिकित्सा सेवाओं के प्रचार में मरीजों की प्रशंसात्मक गवाही, सफलता की कहानियों और उपचार से पहले तथा बाद की तस्वीरों के इस्तेमाल को लेकर भी प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, फर्जी गूगल रिव्यू, पैसे देकर रेटिंग बढ़वाने, ऑनलाइन रैंकिंग में हेरफेर और सेलिब्रिटी अथवा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के माध्यम से अनुचित प्रचार पर रोक लगाने की बात कही गई है।

मरीजों को उपचार के लिए भेजने के बदले कमीशन लेना, भ्रामक छूट या कैशबैक का लालच देना और AI के जरिए मनगढ़ंत मरीजों की गवाही अथवा भ्रामक प्रचार सामग्री तैयार करना भी गंभीर नैतिक मुद्दे माने गए हैं।

स्वास्थ्य शिक्षा और वैज्ञानिक जानकारी साझा करने की अनुमति

इन प्रतिबंधों का अर्थ यह नहीं है कि डॉक्टर सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। जनस्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी, बीमारियों से बचाव के उपाय, वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और अनुमत व्यावसायिक जानकारी साझा करने की गुंजाइश बनी रहती है। हालांकि, ऐसी सामग्री भ्रामक दावों या अनुचित व्यावसायिक प्रचार का माध्यम नहीं बननी चाहिए।

उल्लंघन पर हो सकती है अनुशासनात्मक कार्रवाई

नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित प्रावधानों के अनुसार चेतावनी, नैतिकता संबंधी प्रशिक्षण और गंभीर मामलों में मेडिकल पंजीकरण के निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है। कार्रवाई का स्वरूप मामले की प्रकृति और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

2002 के नियमों से भी जुड़ा है मामला

चिकित्सा क्षेत्र में अनुचित विज्ञापन और मरीज जुटाने के बदले कमीशन जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध से जुड़े कई प्रावधान पहले से ही मेडिकल एथिक्स रेगुलेशंस, 2002 में मौजूद रहे हैं। ऐसे में 2026 के बताए जा रहे दिशा-निर्देशों के संदर्भ में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कौन-से प्रावधान नए हैं और किन पुराने नियमों को डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया, अस्पतालों के प्रचार तथा AI के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है।

चिकित्सा क्षेत्र में विज्ञापन का उद्देश्य मरीजों को सही जानकारी देना होना चाहिए, न कि भ्रामक वादों या व्यावसायिक प्रलोभनों के माध्यम से उन्हें आकर्षित करना। मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सकीय नैतिकता और जनता का विश्वास बनाए रखना इस पूरे विषय का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है।

खालसा न्यूज़नेशन — जनहित, नैतिक चिकित्सा और मरीजों के अधिकार।

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