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उत्तराखण्ड

गुरु तेग बहादुर स्कूल एवं खालसा नेशनल गर्ल्स कॉलेज की चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवाल, सिख संस्थाओं ने जताई आपत्ति

 

पारदर्शी चुनाव और ओपन मेंबरशिप की मांग, सिख फेडरेशन ने दी आंदोलन की चेतावनी

हल्द्वानी। श्री गुरु तेग बहादुर सीनियर सेकेंडरी स्कूल एवं खालसा नेशनल गर्ल्स कॉलेज की चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। आज विद्यालय में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दो लोगों को नामित किए जाने के बाद सिख फेडरेशन एवं अन्य सिख संस्थाओं ने चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराते हुए पारदर्शिता की मांग की है।

सिख संस्थाओं के प्रतिनिधियों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर समाचार पत्र में जारी विज्ञप्ति में वर्ष 2004 एवं 2009 की आजीवन सदस्यता वाले सदस्यों के नाम शामिल किए गए हैं। उनका आरोप है कि सूची में कई ऐसे लोगों के नाम भी दर्ज हैं, जिनका निधन हो चुका है। इसके अलावा, ओपन मेंबरशिप को लेकर भी विज्ञप्ति में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

सिख संस्थाओं ने सवाल उठाया कि यदि शिक्षा विभाग को चुनाव प्रक्रिया शुरू करनी थी, तो सबसे पहले सदस्यता सूची का उचित सत्यापन किया जाना चाहिए था। इसके बाद ही सभी संबंधित पक्षों के साथ आवश्यक जानकारी साझा करते हुए चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए थी।

प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान प्रक्रिया माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के आदेशों की भावना के विपरीत है। हालांकि, इन आरोपों और न्यायालय के आदेशों की प्रासंगिकता की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

सिख फेडरेशन के गुरप्रीत सिंह प्रिंस ने मांग की कि संस्था में ओपन मेंबरशिप की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से शुरू की जाए तथा सिख समाज को विश्वास में लेकर नियमानुसार चुनाव कराए जाएं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया किसी व्यक्ति विशेष के दबाव में नहीं, बल्कि निष्पक्षता और पारदर्शिता के आधार पर होनी चाहिए।

गुरप्रीत सिंह प्रिंस ने कहा कि यह संस्था पूरे सिख समाज की है, किसी एक व्यक्ति विशेष की नहीं। इसलिए संस्था के संचालन एवं चुनाव प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों को उचित अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से शुरू नहीं की गई और उनकी आपत्तियों का उचित समाधान नहीं किया गया, तो सिख फेडरेशन एवं अन्य संबंधित संस्थाएं आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

सिख संस्थाओं की प्रमुख मांगें: आजीवन सदस्यों की सूची का सत्यापन किया जाए।  दिवंगत सदस्यों के नामों की स्थिति स्पष्ट की जाए।। ओपन मेंबरशिप की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से शुरू की जाए। – सिख समाज एवं संबंधित पक्षों को विश्वास में लेकर निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं। चुनाव प्रक्रिया में लागू नियमों एवं न्यायालय के प्रासंगिक आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

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