उत्तराखण्ड
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण से होगा मृदा-जल एवं जलवायु प्रबंधन में नई तकनीकों का विस्तार

आईसीएआर रिफॉर्म उत्सव के तहत तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन, देशभर के 143 वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं ने लिया हिस्सा
देहरादून। भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC), देहरादून में आईसीएआर रिफॉर्म उत्सव के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। “सतत एवं जलवायु-अनुकूल प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण” विषय पर 28 से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम हाइब्रिड माध्यम से संचालित किया गया।
समापन समारोह में संस्थान के पादप विज्ञान प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. जे.एम.एस. तोमर ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि मृदा, जल और जलागम प्रबंधन से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों के प्रभावी समाधान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग तथा डेटा विश्लेषण जैसे आधुनिक तकनीकी उपकरणों का व्यावहारिक उपयोग समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के लिए देशभर से करीब 500 आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन प्रक्रिया के बाद कुल 143 प्रतिभागियों का चयन किया गया। इनमें 36 प्रतिभागियों ने संस्थान में प्रत्यक्ष रूप से, जबकि 107 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रतिभागियों में विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक, संकाय सदस्य, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा नीति-निर्माता शामिल रहे।
जिओ एआई से लेकर मशीन लर्निंग तक मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान ICAR-IISWC, ICAR-IASRI, IIRS-ISRO, ICFRE-IFP, UPES, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र उत्तराखंड और केरल कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने तकनीकी व्याख्यान एवं प्रायोगिक सत्र आयोजित किए।
प्रशिक्षण में जीआईएस एवं रिमोट सेंसिंग के लिए जिओ एआई, एआई आधारित भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण वर्गीकरण, फसल संरक्षण में डीप लर्निंग एवं कंप्यूटर विजन, आर-प्रोग्रामिंग के माध्यम से टाइम-सीरीज विश्लेषण, डिजिटल मृदा मानचित्रण, जलवायु परिवर्तन एवं सामाजिक संवेदनशीलता आकलन तथा पूर्वानुमान मॉडलिंग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
इसके अलावा प्रतिभागियों को RAISINS विश्लेषणात्मक उपकरण तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) की एआई सेवा के उपयोग की भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में वास्तविक डेटा सेट पर अभ्यास, कोड शेयरिंग और विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्रों पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने दी सकारात्मक प्रतिक्रिया।प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रतिभागियों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। कार्यक्रम को 5 में से 4.64 की समग्र रेटिंग प्राप्त हुई, जबकि 96 प्रतिशत प्रतिभागियों ने माना कि प्रशिक्षण से उनके विषयगत ज्ञान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। प्रतिभागियों ने वास्तविक डेटा सेट पर किए गए व्यावहारिक अभ्यास, कोड शेयरिंग और विशेषज्ञों के साथ इंटरैक्टिव सत्रों की विशेष सराहना की। यह राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. शाकिर अली के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. बांके बिहारी (पाठ्यक्रम निदेशक), डॉ. राजेश कौशल (पाठ्यक्रम सह-निदेशक) तथा डॉ. सादिकुल इस्लाम (सह-निदेशक एवं समन्वयक) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

















