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उत्तराखण्ड

मनमाने चालान और उत्पीड़न के विरोध में ट्रक ऑनर्स महासंघ का आंदोलन का ऐलान, 15 दिन का अल्टीमेटम

 

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, हल्द्वानी 12 जुलाई। उत्तराखण्ड देवभूमि ट्रक ऑनर्स महासंघ ने परिवहन एवं पुलिस विभाग द्वारा कथित मनमाने चालान और ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों के उत्पीड़न के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। महासंघ ने सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर के ट्रक स्वामी अपनी गाड़ियों की चाबियां संबंधित आरटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में जमा कर देंगे।

रविवार को हल्द्वानी में आयोजित बैठक में महासंघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों से ट्रांसपोर्ट कारोबारियों, वाहन स्वामियों और चालकों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई से व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि हजारों परिवारों की आजीविका संकट में है और परिवहन कारोबार लगातार नुकसान झेल रहा है।

महासंघ ने आरोप लगाया कि रामनगर के एक ट्रक स्वामी पर 2.41 लाख रुपये का चालान किया गया, जिसे उन्होंने अन्यायपूर्ण बताया। साथ ही चलती गाड़ियों पर ऑनलाइन चालान और बिना चालक के खड़े वाहनों पर चालान चस्पा करने की कार्रवाई को भी उन्होंने नियमों के विपरीत बताया। महासंघ का कहना है कि वीआईपी मूवमेंट, पर्यटन सीजन और वीकेंड के नाम पर सप्ताह में दो से तीन दिन वाहनों का संचालन रोक दिया जाता है, जिससे वाहन स्वामियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

महासंघ ने सरकार से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के लिए पारदर्शी नीति लागू करने, टैक्स एवं पेनाल्टी में राहत देने, चालानों पर वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू करने, पहाड़ी क्षेत्रों में जीवीडब्ल्यू (GVW) सीमा बढ़ाने, ऑटोमेटेड कांटे लगाने तथा वाहन क्षमता के अनुसार खनन सामग्री की रॉयल्टी निर्धारित करने सहित कई मांगें रखीं। इसके अलावा सप्ताह में बाधित संचालन के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए टैक्स, बीमा और चालक वेतन में राहत देने की भी मांग की गई।

महासंघ के अध्यक्ष राकेश जोशी ने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो “गाड़ी मालिक सड़क पर, गाड़ी यार्ड पर” के संकल्प के साथ प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार, परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन की होगी।

बैठक में राकेश जोशी, रमेश चंद्र जोशी, ललित पाठक, चामू सिंह, विक्रम बिष्ट, भास्कर जोशी, जगमोहन उप्रेती, ग्रीस मेलकानी, करन मनराल, धन सिंह गेलाकोटी, आफताब हुसैन, हरजीत सिंह चड्ढा, शिव सिंह, पूरन चंद्र कांडपाल, राजेंद्र सिंह बिष्ट सहित बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्ट व्यवसायी मौजूद रहे।

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