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उत्तराखण्ड

रुक्मिणी-कृष्ण विवाह प्रसंग सुन भक्तिमय हुआ वातावरण, पुष्पवर्षा के बीच मनाया गया दिव्य विवाहोत्सव

 

हल्द्वानी। प्राचीन श्री रामचंद्र मंदिर, रामलीला मोहल्ला में श्री रामचंद्र मंदिर प्रबंधन समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी जी के दिव्य विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। 16 वर्षीय बाल व्यास श्री कृष्णा शरण जी महाराज ने अपनी ओजस्वी एवं मधुर वाणी से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे पंडाल में भक्ति, श्रद्धा एवं उल्लास का वातावरण बना रहा।

बाल व्यास श्री कृष्णा शरण जी महाराज ने कहा कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानती थीं। उन्होंने मन, वचन और कर्म से भगवान श्रीकृष्ण को अपना सर्वस्व स्वीकार कर लिया था। जब उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से कराने का निर्णय लिया, तब रुक्मिणी जी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर अपनी व्यथा और अटूट श्रद्धा व्यक्त की। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम भक्त की पुकार सुनकर समय पर विदर्भ पहुंचकर रुक्मिणी जी का हरण किया और धर्म एवं मर्यादा की रक्षा करते हुए उनका विधिवत वरण कर विवाह संपन्न किया।

उन्होंने कहा कि यह प्रसंग केवल भगवान के विवाह का वर्णन नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण का संदेश देता है। भगवान अपने भक्त की निष्कपट पुकार को कभी अनसुना नहीं करते। जो व्यक्ति निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करता है, उसके जीवन में आने वाली बाधाएं स्वतः दूर होती हैं और ईश्वर की कृपा सदैव उसके साथ रहती है।

जैसे ही कथा में रुक्मिणी-कृष्ण विवाह का प्रसंग आया, कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी के प्रतीक स्वरूप आयोजित विवाहोत्सव में पुष्पवर्षा कर अपनी श्रद्धा अर्पित की। महिलाओं ने मंगलगीत गाए, वहीं भजन-कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया। श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा का रसास्वादन करते रहे।

कथा के दौरान बाल व्यास श्री कृष्णा शरण जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं से अपने जीवन में धर्म, सत्य, सेवा, प्रेम और भक्ति को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति ही मनुष्य को जीवन के प्रत्येक संकट से उबारने का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है।

श्रीमद्भागवत कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा श्रवण कर रहे हैं। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती में सहभागिता की और प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

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